शामली। आखिरकार लंबी प्रतीक्षा के बाद मंगलवार को लखनऊ में यूपी कैबिनेट की बैठक में खेल विभाग को भैंसवाल खेल स्टेडियम की भूमि हस्तांतरित की मंजूरी मिल गई। यूपी कैबिनेट में भैंसवाल खेल स्टेडियम की भूमि हस्तांरित होने के बाद निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।
भैंसवाल गांव के जंगल में 4.51 हेक्टेयर भूमि में खेल स्टेडियम के लिए चिह्नित की गई थी। खेलो इंडिया योजना के तहत करीब तीन साल पूर्व 45.67 करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाकर प्रदेश सरकार को भेजा गया था। प्रदेश सरकार की ओर से स्टेडियम की स्वीकृति के लिए केंद्रीय खेल मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया था। शासन की ओर से भैंसवाल खेल स्टेडियम निर्माण के लिए यूपीसीएल निर्माण एजेंसी नियुक्त किया गया था। निर्माण एजेंसी की ओर से दिल्ली के जवाहर लाल खेल स्टेडियम की तर्ज पर भैंसवाल खेल स्टेडियम का डिजाइन तैयार किया गया। पिछले वर्ष 31 मार्च 2022 को स्टेडियम की स्वीकृति के साथ दस करोड़ के बजट का प्रावधान वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए किया गया था। बाद में भैंसवाल खेल स्टेडियम के 24.90 कराेड़ के एस्टीमेट की योजना को वित्तीय विभाग से प्रशासनिक एवं वित्तीय और तकनीकी स्वीकृति हो चुकी है। यूपीसीएल के खाते में दो करोड़ रुपये हस्तांतरित चुके हैं। पिछले डेढ साल से भैंसवाल स्टेडियम की भूमि राजस्व विभाग से खेल विभाग को हस्तांरित करने का मामला डीएम शामली रविंद्र सिंह ने उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद के चेयरमेन को भेजा था। उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद की संस्तुति के बाद भैंंसवाल खेल स्टेडियम का मामला यूपी कैबिनेट की बैठक में लंबे समय से मंजूरी का इंतजार किया जा रहा था। लंबी प्रतीक्षा के बाद मंगलवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में यूपी कैबिनेट की बैठक में भैंसवाल खेल स्टेडियम की भूमि खेल विभाग को हस्तांरित करने की मंजूरी मिल गई है।
प्रदेश के खेल मंत्री गिरीश यादव के पीआरओ दिनेश सिह यादव ने बताया कि यूपी कैबिनेट की बैठक में भैंसवाल खेल स्टेडियम की भूमि हस्तांरित का अनुमोदन किया गया है। उपक्रीडा अधिकारी अश्वनी कुमार त्यागी का कहना है कि जल्द अगली प्रक्रिया चालू होगी। डीएम रविंद्र सिंह का कहना है कि यूपी कैबिनेट मे भैंसवाल खेल स्टेडियम की भूमि हस्तांतरित के अनुमोदन की जानकारी नहीं है।
रालोद विधायक प्रसन्न चौधरी ने बताया कि खेल मंत्री गिरीश यादव से मिलकर शामली जिले के भैंसवाल खेल स्टेडियम की भूमि राजस्व विभाग से खेल विभाग को हस्तारिंत करने की सिफारिश की गई थी। मंगलवार को लखनऊ कैबिनेट की बैठक में मंजूरी मिल गई है। अब खिलाड़ियों को बाहर खेलने के लिए नहीं जाना पड़ेगा।