फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कच्चे माल के संकट से जूझ रहीं पेपर मिलें

विज्ञापन
विज्ञापन
शामली। कोरोना काल में पेपर मिलों पर भी संकट के बादल छा रहे हैं। विदेशों से आने वाले कच्चे माल (वेस्ट पेपर) की किल्लत होने लगी है। कच्चा माल नहीं मिलने से उत्पादन भी गिर रहा है। यदि यह संकट और बढ़ा तो शुगर मिलों आने वाले समय में और दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
विज्ञापन

जनपद समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश की पेपर मिलों में वेस्ट पेपर की सप्लाई दुबई, आस्ट्रेलिया और अमेरिका आदि देशों से होती है। इन देशों में कोरोना के कारण लॉकडाउन लागू हो जाने से वेस्ट पेपर की सप्लाई बाधित हो गई है। भारत में वेस्ट पेपर नहीं आने से शुगर मिलों को आपूर्ति नहीं हो रही है। निकिता पेपर मिल के मालिक अशोक बंसल बताते हैं कि उनके पेपर मिल में प्रतिमाह औसतन 14 से 15 हजार टन वेस्ट पेपर की खपत है। इसके अलावा मारुति पेपर मिल में भी प्रतिमाह औसतन चार से पांच हजार टन वेस्ट पेपर की जरूरत होती है।
मारुति पेपर मिल के मालिक राजेश्वर बंसल बताते हैं कि पहले कनाडा से वेस्ट पेपर की सप्लाई होती थी, लेकिन अब वहां बड़ा प्लांट लगा दिया गया है। उस पेपर की वहीं पर खपत होने लगी है। इससे आपूर्ति कम हो रही है और जो पेपर आ रहा है उसका दाम भी ज्यादा है। दूसरी वजह कोरोना संकट भी है। यूरोप के कई देशों में लॉकडाउन लागू होने से आपूर्ति पर असर पड़ा है। पेपर मिल मालिक बताते हैं कि करीब 30 प्रतिशत आपूर्ति गिरी है। इससे उत्पादन पर भी उतना ही प्रभाव पड़ा है। यदि जल्द हालात नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में समस्या और बढ़ सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें