संवाद न्यूज एजेंसी
ऊन। तहसील बने दस वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन ऊन को अब तक थाने का दर्जा नहीं मिल पाया है। कई बार प्रस्ताव शासन को भेजे जाने के बावजूद यह मांग लंबित रही। अब एक बार फिर शासन ने ऊन पुलिस चौकी से पिछले आठ वर्षों का आपराधिक रिकॉर्ड और प्रस्तावित भूमि की जानकारी मांगी है, जिससे ऊन को थाना बनाए जाने की उम्मीद फिर से जगी है।
मानकों के अनुसार, किसी भी तहसील मुख्यालय पर एक थाना और एक सीओ सर्कल होना जरूरी होता है। ऊन तहसील मुख्यालय होने के बावजूद अब तक केवल एक पुलिस चौकी के सहारे है। थाना बनाने की मांग वर्ष 2010 से लगातार उठ रही है।
वर्ष 2018 में सहारनपुर रेंज के तत्कालीन डीआईजी ने अपर पुलिस महानिदेशक, मेरठ को थाने के लिए प्रस्ताव भेजा था। इसके बाद दिसंबर 2023 में भी शासन ने एक बार फिर प्रस्ताव मांगा, जिसके तहत एसपी रामसेवक गौतम ने स्वयं ऊन पहुंचकर प्रस्तावित भूमि का निरीक्षण किया और थानाध्यक्ष झिंझाना को रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए।
अब एक बार फिर शासन ने 2016 से 2024 तक का आपराधिक रिकॉर्ड और प्रस्तावित भूमि से संबंधित अभिलेखों की जानकारी मांगी है। यह भी पूछा गया है कि क्या प्रस्तावित भूमि विवाद मुक्त है या नहीं। एसपी रामसेवक गौतम ने बताया कि दोनों मांगी गई जानकारियां शासन को भेज दी गई हैं। जल्द थाने की उम्मीद है।
- भूमि चिह्नित, फिर भी थाने की स्थापना अधर में
शामली। पुलिस विभाग द्वारा वर्ष 2012 में ऊन बाईपास मार्ग पर खसरा संख्या 1242 की नवीन परती भूमि (0.271 हेक्टेयर) को थाने के लिए चिह्नित किया गया था। राजस्व विभाग ने इसे 7 दिसंबर 2012 को पुलिस विभाग के नाम अभिलेखों में दर्ज भी कर दिया था, लेकिन आज तक इस भूमि पर न तो थाने का निर्माण शुरू हो पाया है और न ही पुलिस विभाग ने अपना बोर्ड लगाया है। भूमि अभी भी खाली पड़ी है।