शामली। कुर्सी पर काबिज होने की लालसा, वजूद साबित करने की छटपटाहट और आमना-सामना अपनों से है। चुनावी जंग में नेता पार्टी के नियम कायदों को तवज्जो नहीं दे रहे। बस वर्चस्व कायम करना चाहते हैं। तभी तो जिला पंचायत चुनाव में राजनीति के धुरंधर अपनी ही पार्टी के नेताओं के सामने चुनाव लड़ रहे हैं।
समाजवादी पार्टी में यह स्थिति सबसे ज्यादा है। कैराना से सपा विधायक नाहिद हसन की बहन इकरा हसन जिला पंचायत के वार्ड 14 से चुनाव लड़ रही है। इसी वार्ड से मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्ष एवं सपा एमएलसी वीरेंद्र सिंह के बेटे मनीष चौहान चुनाव मैदान में हैं। इन दोनों के बीच ही चुनाव जंग है, दोनों ही नेता अपनी जीत पक्की करने के लिए भरसक प्रयास में लगे हुए हैं।
उधर, जिला पंचायत वार्ड 10 से विधायक नाहिद हसन की मां पूर्व सांसद तबस्सुम हसन चुनाव लड़ रही हैं, तो उनके सामने मौजूदा ब्लाक प्रमुख अय्यूब जंग की पत्नी संजीदा चुनाव मैदान में हैं। अय्यूब जंग समाजवादी पार्टी में जिला उपाध्यक्ष भी हैं। तबस्सुम हसन को जिताने के लिए उनके बेटे विधायक नाहिद हसन ने पूरी ताकत झोंक रखी है। इसी तरह सपा जिलाध्यक्ष किरणपाल कश्यप के बेटे भारत कश्यप जिला पंचायत वार्ड नौ चुनाव लड़ रहे हैं, तो उनके सामने समाजवादी पार्टी से ही जुड़े एक और नेता ने ताल ठोंक रखी है।
वहीं, जिला पंचायत वार्ड 12 पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी के सामने भाजपा से जुड़े एक नेता ने टिकट न मिलने पर चुनावी लड़ाई शुरू कर दी। नामांकन भी दाखिल किया और गांव दर गांव चुनाव प्रचार कर रहे हैं। लब्बोलुआब यही है कि चुनावी मेले में हर कोई कुर्सी पर आसीन होना चाहता है, अब चाहे पार्टी के नियम कायदे टूटते हैं, तो टूट जाएं। बेशक वह पार्टी कार्यक्रमों में बेशक वह एक मंच साझा करें, मगर अब तो लड़ाई आमने सामने की है। देखना यह है कि चुनावी जंग में किसके सिर जीत का सेहरा बंधता है।