शामली। यमुना नदी के किनारे बसे गांवों को बारिश के मौसम में बाढ़ से बचाने की कवायद अभी से शुरू हो गई है। इसके लिए डीएम ने बाढ़ प्रबंधन के संबंध में अधिनस्थों के साथ मीटिंग की और इस संबंध में कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। इसके अलावा सूखे को देखते हुए भी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।
सोमवार को कलक्ट्रेट सभागार में आयोजित आपदा प्रबंधन की बैठक हुई। जिसमें डीएम सुजीत कुमार ने कहा कि 31 मई तक बाढ़ से निपटने के लिए तटबंधों की मरम्मत के रखरखाव के लिए कार्ययोजना तैयार कर लें। डीएम ने एसडीएम, तहसीलदार केे मौके पर निरीक्षण करने के निर्देश दिए।
जहां पर आवश्यकता है वहां पर एक सप्ताह के अंदर बाढ़ से बचाव के व्यापक प्रबंध करने के निर्देश दिए। शामली की भौगोलिक सीमा में आने वाले यमुना नदी की बाई ओर 52.730 किमी लंबाई के तटबंध की जंगल सफाई, सघन चेकिंग तथा कमजोर स्थलों की मरम्मत की जाए।
उन्होंने बिड़ौली, केरटू, रामड़ा एवं हैदरपुर के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया। डीएम ने यमुना नदी के पास बसे गांव में पेयजल व्यवस्था के लिए नए हैंडपंप लगाने के निर्देश दिए। वहीं, एडीएम भरत पांडे ने कहा कि जिन गांव में बाढ़ का खतरा संभावित है, वहां पर पशुओं का टीकाकरण एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से औषधियों की पर्याप्त पूर्ति सुनिश्चित की जाएं।
उन्होंने सूखे की स्थिति पड़ने पर पशुपालन विभाग को चारे की व्यवस्था करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही गर्मी एवं लू से बचाव के लिए नगर पालिका व नगर पंचायत अधिशासी अधिकारियों को पेयजल के लिए वाटर कूलर एवं भीषण गर्मी से बचाव के लिए छाया की व्यवस्था करने पर जोर दिया।
आयोजित बैठक मेें मुख्य रूप से शामिल होने वालों में एसडीएम शामली श्याम अवध चौहान, एसडीएम ऊन महेंद्र पाल सिंह, एसडीएम कैराना इंद्रसेन यादव, सीओ भवन भूषण वर्मा, ड्रेनेज विभाग के अधिशासी अभियंता केपी सिंह, सहायक अभियंता यासीन खां, तहसीलदार ऊन मदन लाल राठौर, नायब तहसीलदार देवेंद्र पांडेय, अधिशासी अधिकारी शैलेेंद्र मिश्र, रवि यादव, कासिम अंसारी, सीवीओ डॉ. भूपेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।