शामली। जिले में गर्भवती महिलाओं में पोषण की कमी के कारण प्रीमेच्योर बच्चे जन्म ले रहे हैं। जिले में आठ महीने में 554 बच्चे प्रीमेच्योर पैदा हुए हैं। इनका वजन कम पाया गया। हालांकि इन बच्चों को एसएनसीयू में रखकर उपचार किया जाता है।
जिले में एक अप्रैल से 31 दिसंबर तक 27225 गर्भवती महिलाओं के प्रसव हुए। इनमें 554 बच्चे प्रीमेच्योर पाए गए। सीएचसी शामली में इस अवधि में 1345 जन्में बच्चों में 122 प्रीमेच्योर हुए। जिला अस्पताल में जून माह से प्रसव की सुविधा शुरू हुई। यहां पर 760 में 26 बच्चे प्रीमेच्योर हुए।
n ये होते हैं प्रीमेच्योर
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक आशुतोष श्रीवास्तव ने बताया कि जो बच्चे समय से पहले यानि 37 सप्ताह से पहले होते हैं। इसके अलावा जिन बच्चों का वजन एक किलो 800 ग्राम से कम होता है, वे प्रीमेच्योर की श्रेणी में माने जाते हैं। उपचार के बाद बच्चे स्वस्थ हो जाते हैं।
n प्रीमेच्योर बच्चे होने के कारण व बचाव : सीएचसी शामली के स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. विजेंद्र कुमार ने बताया कि प्रीमेच्योर बच्चे होने के कई कारण है। इनमें गर्भवती महिलाओं में डायबिटिज, हाइपर टेंशन, गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रेशर व शुगर होना, असंतुलित और पौष्टिक आहार की कमी होना, ध्रूमपान, तनाव, प्लेसेंटा (नाल) में बीमारी होना आदि कारण होते हैं।
गर्भवती महिलाओं को समय-समय पर जांच कराते रहना चाहिए और चिकित्सक की परामर्श के अनुसार दवा के साथ संतुलित व पौष्टिक आहार लेना चाहिए। संवाद