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Shamli News: ताले में बंद पोषण, कुपोषण से थका बचपन

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शामली। जिले में पांच साल तक के 2,888 बच्चे कुपोषण की चपेट में हैं। इनमें से 401 बच्चे अति कुपोषित हैं, लेकिन इन मासूमों की देखभाल के लिए बने पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में अक्सर ताला लटका रहता है। जहां उम्मीदें इलाज और पोषण की थीं, वहां अब सन्नाटा है। कारण सिर्फ एक, जागरुकता की कमी।
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जिले में पांच साल तक के बच्चों में कुपोषण या अति कुपोषण की समस्या होने पर जिला अस्पताल में एनआरसी खोला गया है। इस केंद्र पर बच्चों को उनकी स्थिति के अनुसार अधिकतम 14 दिन तक रखकर उन्हें पोषक तत्वों के अलावा दवा और उचित देखभाल से कुपोषण की समस्या को दूर किया जाता है, लेकिन जागरुकता और जानकारी के अभाव के चलते अभिभावक एनआरसी में बच्चों को भर्ती कराने में कम ही रुचि ले रहे हैं, जिस कारण एनआरसी कक्ष पर अक्सर ताला लटका रहता है। एनआरसी में बच्चे भर्ती न होने से कुपोषण की समस्या लगातार सामने आ रही है।
एनआरसी की प्रभारी डॉ. सानिया ने एनआरसी में चार बच्चे भर्ती होना बताया। उनका कहना है कि जो बच्चा भर्ती होता है, उसे दवा, उपचार के साथ उचित देखभाल की जाती है। उन्होंने बताया कि एनआरसी में भर्ती होने वाले बच्चे और उसके साथ रहने वाले अटेंडेंट को निशुल्क भोजन, दूध और प्रोटीन निशुल्क दिया जाता है। एनआरसी में कम बच्चे आ रहे हैं, जो भी बच्चा भर्ती होता है, उसे दवा, उपचार और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
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ब्लाॅकवार अति कुपोषित और कुपोषित बच्चों की संख्या

ब्लाक- अति कुपोषित - कुपोषित



कैराना - 56 - 386

कांधला - 102 - 483
शामली - 21 - 269
थानाभवन - 61 - 465

ऊन - 161 - 884
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लक्षण:
शारीरिक वजन कम होना, उभरी हुई हड्डियां, कम वसा और मांसपेशियां।



पतले हाथ और पैर, पेट और चेहरे पर सूजन।

बच्चों में विकास और बौद्धिक विकास अवरुद्ध होना।

कमजोरी, बेहोशी और थकान होना।

चिड़चिड़ापन, उदासीनता या असावधानी।

शुष्क त्वचा पर चकत्ते और घाव बनना।

बार-बार और गंभीर संक्रमण।
शरीर का तापमान कम होना, गर्म न हो पाना।

कम ह्दय गति और रक्तचाप होना।




कोट



जिले में कुपोषण दूर करने के लिए जिला अस्पताल में एनआरसी है। एनआरसी में हर महीने 10-12 बच्चे भर्ती होते हैं, उन्हें पोषक तत्व, दवा व अन्य माध्यमों से पांच साल तक को दी जाता है। बच्चे को केंद्र पर 14 दिन रखा जाता है। लोगों में जागरुकता की कमी के कारण बच्चे कम भर्ती हो रहे हैं। बच्चों से कुपोषण दूर करने के लिए सभी को जागरूक होने की जरूरत हैं।

- यामिनी रंजन, जिला कार्यक्रम अधिकारी।



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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, एएनएम, आरबीएसके टीम और टीकाकरण सत्र के दौरान पांच साल तक के कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों को चिह्नित किया जाता है। चिह्नित बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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-डॉ. अनिल कुमार, सीएमओ।
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