शामली। बजरंग दल के जिला संयोजक विवेक प्रेमी पर लगे रासुका को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने निरस्त कर दिया है। छह महीने पूर्व गोवंश चोरी के आरोपी की पिटाई करने पर जिला प्रशासन ने विवेक पर रासुका लगाकर कार्रवाई करते हुए जेल भेज दिया था। रासुका निरस्त करने संबंधी गृह मंत्रालय का आदेश जिला कारागार तक पहुंच गया है। अब जल्दी ही विवेक जेल से रिहा हो सकता है।
जून माह में गोवंश चोर की सरेआम पिटाई करने पर दस जुलाई को जिला प्रशासन ने विवेक प्रेमी पर रासुका की संस्तुति की थी। इसके खिलाफ विवेक प्रेमी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय तथा रासुका बोर्ड में भी अपील की, लेकिन अपील खारिज हो गई थी। इसके फलस्वरूप रासुका बोर्ड ने भी प्रत्यावेदन खारिज कर दिया था। दोबारा नए सिरे से अपील तैयार की गई और गत 31 दिसंबर को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने विवेक की रिहाई का मार्ग प्रशस्त कर दिया। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपने रेडियो संदेश संख्या 11/5028/122/2015 एनएसए दिनांक 31-12-2015 द्वारा विवेक प्रेमी पर रासुका लगाए जाने के जिलाधिकारी शामली के आदेश को निरस्त कर उसकी रिहाई करने के संबंध में कारागार अधीक्षक मुजफ्फरनगर को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
कारागार अधीक्षक मुजफ्फरनगर राकेश कुमार सिंह ने अपने पत्र संख्या 275/एआर-2016 दिनांक दो जनवरी 2016 द्वारा डीएम शामली को केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश से अवगत कराया है। मुजफ्फरनगर कारागार अधीक्षक ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय का आदेश प्राप्त हो गया है। उसके आधार पर न्यायालय से आदेश जारी होने के बाद ही विवेक प्रेमी की रिहाई होगी।
ये था मामला
25 जून 2015 को बजरंग दल के जिला संयोजक विवेक प्रेमी और संगठन के कार्यकर्ताओं ने नवीन मंडी स्थल पर विचरण करने वाले गोवंश को वध करने के उद्देश्य से चोरी कर ले जा रहे दूसरे समुदाय के युवक को पकड़ लिया था। पकड़े गए आरोपी रियाज निवासी जवाहर नगर बनत को पिटाई करते हुए पुलिस को सौंप दिया था। जिसके बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया। आरोपी के पक्ष में आए लोगों द्वारा दबाव बनाने पर पुलिस प्रशासन ने रिपोर्ट दर्ज करते हुए विवेक प्रेमी पर रासुका की संस्तुति कर दी थी। डीएम ओपी वर्मा ने अपने आदेश संख्या524/ एनएसए/जेए 10 जुलाई 2015 द्वारा जिला कारागार में रासुका तामील कराई गई थी।
वीडियो वायरल होने पर मचा था हड़कंप
गोवंश चोर की बेल्ट से पिटाई करने की वीडियो वायरल हो गई थी। तब आरोपी के पक्ष में दूसरे समुदाय के लोग लामबंद हो गए थे। शामली से लेकर लखनऊ तक अधिकारियों में हड़कंप मच गया था, जिसके चलते दबाव बनने पर पुलिस ने विवेक प्रेमी पर रासुका के तहत कार्रवाई करनी पड़ी थी।