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नोटबंदी ने बिगाड़ा सब्जी व्यापारियों का स्वाद

Wed, 28 Dec 2016 12:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
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public news - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली। नोटबंदी हुए 47 दिन बीत गए, कारोबार पूरी तरह कैशलेस हो नहीं पाया। ऐसे में सब्जी व्यापारियों पर दोहरी मार पड़ रही है। एक तरफ आढ़ती कैश में ही कारोबार कर रहे हैं, जिससे व्यापारियों को सब्जी खरीदकर लाने में दिक्कत है, तो कैश की किल्लत के कारण ग्राहक सिर्फ जरूरत भर खरीददारी कर रहे हैं। इसकी वजह से व्यापार 60 प्रतिशत तक कम हो गया है। 
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नोटबंदी के बाद अब तक व्यापार पर किस तरह का प्रभाव पड़ा, इसको लेकर अमर उजाला टीम ने सब्जी की दुकानें करने वाले व्यापारियों के साथ ही आढ़तियों से बातचीत की। आलम यह है कि किसी भी दुकानदार के पास पेटीएम या स्वाइप की सुविधा नहीं है। ग्राहक बाजार में खरीदारी करने आते तो जरूर हैं, मगर पहले जैसी बिक्री नहीं हो रही। वहीं, सब्जी मंडी के आढ़ती भी अभी कैशलेस व्यवस्था की तरफ रुख नहीं कर पाए हैं। सब्जी मंडी में सभी आढ़ती नगदी में ही कारोबार कर रहे हैं। इसका सीधा असर कारोबार पर पड़ रहा है। 

घट गए दाम, पर नहीं बढ़ बिक्री 
मटर 15 रुपये किलो, गोभी 10 रुपये, टमाटर 15 और आलू 30 से 40 रुपये (प्रति पांच किलो) तक बिक रहा है। अधिकांश सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि सब्जी का यह दाम इससे दोगुना होता था, लेकिन नोटबंदी के बाद दाम घट गए हैं। क्योंकि स्थानीय स्तर पर पैदावार होने वाली सब्जी का दूसरे शहरों में जाना कम हो गया है।
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जितनी सब्जी खरीदकर लाते हैं, वह पूरी बिक नहीं पाती है। कच्चा माल होने के कारण अगले दिन खराब हो जाता है, जिससे काफी नुकसान हो रहा है। नोटबंदी का काफी असर व्यापार पर हुआ है। कैश लेस व्यापार करना मुश्किल है, क्योंकि अनपढ़ व्यापारी उसे संभाल नहीं पाएगा। - हाजी इलियास।

कैश लेस कारोबार कैसे करें, सभी ग्राहक भी तो नकदी देकर ही सामान खरीदते हैं। हमें भी किसानों को कैश ही भुगतान करना पड़ता है, तो हम व्यापारियों से भी माल की कीमत कैश में लेते हैं। - मदनलाल आढ़ती

नोटबंदी ने व्यापार बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। बिक्री आधी हो गई है। औने पौने दाम में माल बेचना पड़ रहा है। नोटबंदी से कोई फायदा नहीं हुआ, बल्कि अब तक नुकसान ही झेलना पड़ा है। - हरपाल। 

यदि मंडी से एक क्विंटल प्याज और आलू खरीदकर लाते हैं, तो उसमें से सिर्फ 25% ही बिक्री हो रही है। नोटबंदी से पहले की स्थिति ऐसी नहीं थी। ग्राहक भी एक किलो या दो किलो सामान खरीदते हैं, तो उनसे पेटीएम से भुगतान आखिर कैसे लिया जाएगा। - कृपाल।

कैशलेस व्यवस्था देश के लिए अच्छी बात है, लेकिन अभी देशवासी इसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं है। हमारा व्यापार  60 प्रतिशत तक कम हो गया है, मगर खुशी इस बात की है कि जिन लोगों ने अपने पास काला धन इकट्ठा कर रखा था, उनके खिलाफ कार्रवाई हो रही है।  - राजीव कुमार। 
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