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न मानक पूरे मिले, न कचरे के निस्तारण का इंतजाम

Mon, 06 May 2019 12:03 AM IST
Deepak Sharma शामली/अमर उजाला/ब्यूरो
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raid - फोटो : अमर उजाला
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थानाभवन (शामली)। मोहल्ला रेत्ती में दो दिन पहले कूड़े के ढेर में हुए धमाके के बाद कस्बे के पटाखा निर्माता पुलिस प्रशासन के निशाने पर हैं। रविवार को एसडीएम और सीओ के नेतृत्व वाली टीम ने कस्बे के 10 पटाखा फैक्ट्रियों में छापेमारी की। इसमें कई खामियां मिली। सभी को सुधार के लिए चेतावनी दी गई है।
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रविवार को जिलाधिकारी के निर्देश के बाद उपजिलाधिकारी सुरजीत कुमार, सीओ सुरेंद्र यादव व थानाध्यक्ष संदीप बालियान ने पुलिस बल के साथ कस्बे में छापेमारी अभियान चलाया। सबसे पहले टीम ने सहारनपुर मार्ग पर स्थित एक फैक्टरी में छापा मारा। अधिकारियों के अनुसार जांच करने पर पता चला कि इस फैक्टरी से निकलने वाला कचरा पास में ही कृष्णा नदी में फेंका जा रहा है।

जो मानकों के विपरीत तो है ही साथ ही इससे नदियों में प्रदूषण भी फैल रहा है। इसके बाद टीम पास की ही एक दूसरी फैक्टरी में पहुंची। यहां भी पटाखा निर्माण के बाद बचे विस्फोटक को नष्ट करने की कोई सही व्यवस्था नहीं मिली। उन मार्ग स्थित फैक्ट्री में जांच में सुरक्षा को लेकर कोई मानक उपलब्ध नहीं मिले।
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इसके बाद टीम दूसरे लाइसेंसधारी पटाखा निर्माता की फैक्टरी पहुंची तो यहां छत के नाम पर छप्पर डाला हुआ था, जिससे कभी भी यहां कोई हादसा हो सकता है। साथ ही दीवारें भी क्षतिग्रस्त हालत में मिली। इस पर एसडीएम और सीओ ने फैक्टरी मालिक को जमकर फटकार लगाई। शाहविलायत पीर के पास एक पटाखा फैक्टरी बंद मिली। मालिक को बुलवाकर जब उसे खुलवाया गया तो वहां भी सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थी। इसके बाद टीम शरीफ के कारखाने पहुंची। यहां भी काम लगभग बंद मिला। अंत में टीम ने एक ओर फैक्टरी में छापामारी की। यहां व्यवस्था कुछ हद तक ठीक मिली।

अपशिष्ट के कारण ही हुआ था हादसा
पुलिस की मानें तो दो दिन पहले मोहल्ला रेत्ती में कूड़े के ढेर में विस्फोटक सामग्री का कचरा डाला गया था। यही वजह थी कि आग लगने पर वहां धमाका हुआ और एक महिला झुलस गई। बावजूद इसके अधिकांश फैक्ट्रियों में पटाखा, आतिशबाजी बनाने से निकलने वाले अपशिष्ट प्रबंधन की कोई व्यवस्था नहीं मिली। यदि इस वजह से भविष्य में कोई बड़ा हादसा होता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा।

फैक्टरी कर्मचारियों का होगा सत्यापन
निरीक्षण के दौरान सीओ सुरेंद्र यादव ने थानाध्यक्ष को निर्देश दिए कि सभी फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों का सत्यापन किया जाएं। उन्होंने संदेह जताया कि यहां काम करने वाले कारीगर भी संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। इसलिए शीघ्र ही सभी कारीगरों का सत्यापन और समय-समय पर उनकी गतिविधियों की जांच होनी चाहिए।

नाम की फैक्टरी, काम घरों में
निरीक्षण के दौरान दो या तीन फैक्ट्रियों के बजाए अधिकांश पर नाम-मात्र का काम चलता पाया गया। इस पर सीओ ने बताया कि अंदेशा है कि फैक्टरी केवल दिखावे के लिए बनाई गई है और इनका असली काम लोगों के घरों में चलवाया जा रहा है। यही वजह है कि कस्बे में पटाखों के कारण कई हादसे हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि संदिग्ध घरों में तलाशी ली जाएं। यदि कहीं पटाखे बनाने वाले पकड़े जाएं तो उनसे असली मालिक या लाइसेंसधारी का नाम पता किया जाएं। ताकि उन मालिकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो लाई जा सके।

ये मिलीं खामियां
- बचे हुई विस्फोटक निर्माण सामग्री के निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं
- कुछ जगहों पर फायर सुरक्षा के मानक नहीं
- दो फैक्टरी मात्र एक ही कमरे में की जा रही संचालित
- कुछ जगहों पर दीवारें क्षतिग्रस्त
- तीन फैक्ट्रियों पर किया जा रहा नाममात्र का काम।

13 में से दस फैक्ट्रियों की जांच पहले दिन की गई है। कुछ जगहों पर कुछ खामियां मिली हैं। इस संबंध में शीघ्र व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। एक जगह पर अपशिष्ट नदी में डाला जा रहा है, जो नियमानुसार गलत है। जल्द ही वह अपनी जांच तैयार कर रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजेंगे। उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। - सुरजीत कुमार, उपजिलाधिकारी।

जिले के सभी एसडीएम को निर्देश दिए गए हैं कि वे भी अपने यहां जांच पड़ताल करा लें। लाइसेंसधारी निर्माताओं के यहां मानकों की जांच करने को कहा गया है। साथ ही बिना लाइसेंस पटाखा बनाने और बेचने वालों पर भी सख्त कार्रवाई के लिए निर्देशित कर दिया गया है। - अखिलेश सिंह, डीएम।
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