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तनाव मुक्त जीवन के लिए हंसना बहुत जरूरी

Mon, 06 May 2019 12:00 AM IST
Deepak Sharma शामली/अमर उजाला/ब्यूरो
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laugh - फोटो : अमर उजाला
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शामली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग तनाव भरी जिंदगी जी रहे हैं। हर कोई किसी न किसी बात को लेकर चिंतित रहता है। तनाव के चलते शरीर में कई तरह की बीमारियां जन्म ले लेती हैं, जिसका परिणाम सेहत के लिए खतरनाक होता है। ऐसे वातावरण में बीमारियों से बचाव और सेहत के लिए हंसना सबसे अच्छा माध्यम है। अगर हमें तनाव मुक्त जीवन जीना है तो हंसना बहुत जरूरी है।
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हर साल मई माह के पहला रविवार विश्व हास्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। हंसी एक ऐसा योग है। जिससे सकारात्मक और शक्तिशाली भावना उत्पन्न होती है। जिससे व्यक्ति को ऊर्जावान और संसार को शांतिपूर्ण बनाने के सभी तत्व उपस्थित रहते हैं। हंसने से मन को शांति मिलती है और आपसी भाईचारे और सद्भाव को बढ़ावा मिलता है, लेकिन आज के वातावरण में तो मानो लोग हंसना भूल ही गए हैं।

हंसी तो जैसे लोगों से दूर होती जा रही है। कोई पढ़ाई को लेकर तो कोई करियर को लेकर तो कोई रोजगार को लेकर और कोई बिजनेस को लेकर हर कोई तनावमुक्त जीवन जी रहा है।
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उपमुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर सुशील कुमार का कहना है कि तनाव में जीने से ब्लड प्रेशर, शुगर, हृदय रोग संबंधी और डिप्रेशन जैसी कई बीमारियां बढ़ रही हैं। ऐसे वातावरण में बीमारियों से बचाव का सबसे अच्छा तरीका हंसना है। अक्सर देखने में भी आता है कि हंसमुख व्यक्ति को ब्लड प्रेशर, शुगर जैसी बीमारियां नहीं होती। कुल मिलाकर देखा जाए तो तनाव मुक्त जीवन के लिए हंसना जरूरी है।

हंसने से शरीर को होने वाले लाभ
एसीएमओ डॉक्टर सुशील कुमार के मुताबिक मानव शरीर में पेट और छाती के बीच में एक झिल्ली होती है, जो हंसते समय धौंकनी का काम करती है। इसके परिणाम स्वरूप पेट, फेफड़े और यकृत की मालिश हो जाती है। हंसने से प्राणवायु का संचार अधिक होता है और दूषित वायु बाहर निकलती है। नियमित रूप से खुलकर हंसना शरीर के सभी अवयवों को ताकतवर और पुष्ट करता है। हंसने से शरीर में रक्त संचार की गति बढ़ जाती है और पाचन तंत्र अधिक कुशलता से कार्य करता है।

लाइफ स्टाइल बदला, मोबाइल, टीवी तक हो गए सीमित
करीब दो दशक पहले तक लोग पास में सुबह शाम मोहल्ले में या चौपाल पर इकट्ठे होकर आपस में बातचीत करते हुए हंसी मजाक करते थे। एक दूसरे के सुख दुख में भागीदार बनते थे। इस हंसी खुशी के माहौल में व्यक्ति दुख दर्द को भूलकर तनावमुक्त हो जाता था, लेकिन अब लोगों का लाइफ स्टाइल बदल गया है। अब मोबाइल, टीवी और सोशल मीडिया पर व्यक्ति इतना व्यस्त हो गया है कि वह सिर्फ अपने तक सीमित होकर रह गया है। यहां तक कि अपने परिवार के लोगों से सिर्फ काम की बात करते है। हंसना और हंसाना तो दूर की बात हो रही है। आज यह हालात बन गए है कि व्यक्ति काम कम और तनाव अधिक लेता है, जबकि होना ये चाहिए की काम अधिक करें और तनाव कम लें, तभी व्यक्ति हंसी खुशी के साथ स्वस्थ रह सकता है।
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