शामली। सड़क सुरक्षा एवं यातायात जागरूकता माह चल रहा है। एसपी खुद फूल बांटकर पब्लिक से नियमों का पालन करने की दरख्वास्त कर रहे हैं। शहर में तीन स्टेट हाईवे है, चौदह लाख से अधिक की आबादी है और पचास हजार से अधिक वाहन। इसके बावजूद ट्रैफिक कंट्रोल करने के लिए यातायात पुलिस के पास महज नौ पुलिसकर्मी हैं।
शामली जिले को बने पांच साल से अधिक व्यतीत गए। कहने को जिला है., लेकिन पांच साल होने के बाद भी आज तक शामली एक जिले का रूप नहीं ले सका है। हां आबादी और वाहनों की संख्या जरूर बढ़ी है।
शामली के बीच से तीन हाईवे एक दूसरे को क्रास करते हैं। दिल्ली-यमुनोत्री मार्ग, पानीपत-खटीमा मार्ग और मेरठ-करनाल मार्ग। इन सभी हाईवों से रोज लाखों वाहनों की आवाजाही रहती है, लेकिन इस ट्रैफिक को कंट्रोल करने के लिए आज तक यातायात विभाग पर्याप्त संसाधनों से लैस नहीं हो पाया है।
ट्रैफिक बूथ, रेड लाइट की व्यवस्था नहीं
शामली में ट्रैफिक पुलिस के पास ट्रैफिक बूथ नहीं है। नतीजतन ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को सड़क के बीच खड़े होकर ट्रैफिक को संचालित करना पड़ता है। इसके अलावा जिले में अजंता चौक पर सोलर रेड लाइट लगाई गई थी, यह लाइट शुरू में तो चली, लेकिन उसके बाद आज तक खराब पड़ी है। यही नहीं वाहन चालक ने शराब पी है या नहीं। इसको भी चेक करने के लिए ट्रैफिक पुलिस के सुविधा नहीं है।
जिले में एक टीएसआई की तैनाती
शहर में विजय चौक, अजंता चौक है। दोनों ही चौपलों पर भारी भीड़ रहती है और अक्सर जाम लगा रहता है। इसके अलावा गुरुद्वारा तिराहा, धीमानपुरा फाटक, बुढ़ाना रोड तिराहा, एसटी तिराहा, कैराना में कैराना बाईपास के दो छोर, कांधला अड्डा, कांधला में कैराना रोड सहित कई प्वाइंट है, जहां पर यदि ट्रैफिक पुलिस न रहे तो जाम लगना मामूली बात है, लेकिन इन सभी जगहों पर ट्रैफिक को कंट्रोल करने के लिए यातायात पुलिस के पास महज एक टीएसआई, दो एचसीपी तथा छह सिपाही हैं। हालांकि दस के करीब होमगार्ड की ड्यूटी सहायता के लिए लगाई जाती है, जो अपर्याप्त है।
इसमें कोई शक नहीं है कि स्टाफ कम है। इसके बावजूद ट्रैफिक पुलिस बेहतर करने का प्रयास कर रही है। रेड लाइट के बारे में लिखा जाएगा तथा खराब पड़ी लाइटों को ठीक कराया जाएगा। - उपेंद्र कुमार यादव सीओ ट्रैफिक