शामली। एक साल पहले जिले में कोरोना का हर तरफ खौफ फैला हुआ था। सड़क हो या बाजार सब जगह सन्नाटा पसरा था। कोरोना के केस लगातार बढ़ रहे हैं। कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आते ही लोगों में डर बन जाता था। उन्हें लगता था कि अब तो उनका सब कुछ गया, लेकिन उनकी हिम्मत, हौसले और आत्मविश्वास ने कोरोना की जंग जीती और ठीक होकर घर लौटे। तो कुछ ने होम आइसोलेट रहकर एहतियात बरती। कोरोना की लड़ाई लड़ने वाले अब फिर से अपने कामकाज, नौकरी पेशा वाले अपनी ड्यूटी कर सामान्य जीवन बिता रहे हैं। अब फिर से देश के कई राज्यों में कोरोना के केस बढ़ रहे हैं। ऐसे में इन कोरोना योद्धाओं से बातचीत की गई। उन्होंने कहा कि कोरोना से डरे नहीं, बचाव के लिए सावधानी बरतें और हौसला बरकरार रखें, तो निश्चित ही कोरोना पर जीत मिलेगी।
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14 दिन में ठीक होकर घर पहुंचा था शाहनवाज
कस्बा कैराना निवासी शाहनवाज की 24 मार्च को कोरोना संक्रमित आया था। यह सहारनपुर मंडल में कोरोना का पहला केस था। शाहनवाज को सीएचसी शामली के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया था। शाहनवाज बताते हैं कि एक बार उन्हें लगा कि पता नहीं अब क्या होगा, लेकिन उन्होंने हौसला रखा। चिकित्सकों ने उपचार किया तो 14 दिन बाद वह ठीक होकर अपने परिवार के बीच पहुंचे। कोरोना से घबराएं नहीं, एहतियात बरतें। ठीक होने के बाद से वह अपनी दुकान चला रहे हैं।
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मरीजों का उपचार करते खुद कोराना संक्रमित हुए
सीएचसी शामली में फार्मासिस्ट उत्तम कुमार ने बताया कि झिंझाना में बनाए गए कोविड अस्पताल में उनकी ड्यूटी लगी थी। कोरोना को लेकर किसी तरह का मन में डर नहीं था। मरीजों का उपचार करते हुए कुछ दिन बाद खुद कोरोना से पीड़ित हो गए। उन्होंने आइसोलेशन में रहकर सावधानी बरती और ठीक होकर फिर से कोरोना के मरीजों के उपचार में जुट गए।
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छह माह तक नहीं लिया था अवकाश
सीएचसी शामली में लैब टेक्नीशियन अभिषेक शर्मा ने बताया कि जब कोरोना को लेकर डर का माहौल था, उस दौर में उन्होंने जिले में सबसे अधिक सैंपल लेने का रिकार्ड बनाया। छह माह तक उन्होंने अवकाश नहीं लिया और घर न जाकर लगातार ड्यूटी की। उस दौर में संक्रमण इतना ज्यादा था कि वे खुद कोरोना संक्रमित हो गए थे। कुछ दिन तक उन्हें आईसीयू में रहना पड़ा, लेकिन वह कोरोना से कतई नहीं घबराएं और सावधानी बरती। ठीक होने के बाद वे फिर कोरोना के सैंपलिंग के कार्य में जुट गए। वर्तमान में वे जिले के सभी सैपलों को जांच के लिए मेरठ ले जाने का कार्य कर रहे हैं।
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कोविड अस्पताल में भर्ती रहे, कोरोना को हराया
मोहल्ला गोशाला रोड निवासी निजी चिकित्सक डॉ. विपिन कौशिक के यहां कंपाउंडर का काम करने वाले हिमांशु 17 जुलाई को कोरोना संक्रमित होने पर झिंझाना के कोविड अस्पताल में भर्ती रहे। कोरोना को लेकर मन में कोई डर नहीं था। इच्छा शक्ति और हौसले के दम पर वह ठीक होकर घर लौटे। इसके बाद से वह सामान्य जीवन जी रहे हैं।
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पूरे परिवार को हुआ कोरोना, पर नहीं था डर
मोहल्ला मुरारी वाला कुआं बड़ा बाजार निवासी निजी चिकित्सक संजय कौशिक ने बताया कि अगस्त के महीने वह कोरोना पॉजिटिव हुए। साथ में पत्नी व दोनों बच्चे भी कोरोना पॉजिटिव हुए, लेकिन किसी भी तरह का डर या शंका मन में नहीं थी। हौसला रखा और परिवार को भी हिम्मत बंधाई। घर में आइसोलेट रहे और सावधानी बरती। इसका नतीजा यह रहा कि पूरा परिवार ठीक होकर फिर से पहले की तरह सामान्य तरीके से जीवन चल रहा है।
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खुद के साथ मां को भी संभाला
दयानंद नगर निवासी सीएचसी के फार्मासिस्ट संजीव शर्मा ने बताया कि अस्पताल में उनकी ड्यूटी रही। 20 सितंबर को कोरोना संक्रमित हुए। साथ में उनकी मां की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई। परिवार में कोरोना का भय का माहौल बन गया था, लेकिन उन्होंने मां समेत पूरे परिवार का हौसला बढ़ाया और कोरोना पर जीत पाई। अब फिर से देश में कोरोना केस बढ़ रहे हैं तो ऐसे में लोग डरें नहीं। लापरवाही न बरतें, मास्क लगाएं, सोशल डिस्टेंस का पालन करें और कोरोनारोधी वैक्सीन का टीका लगवाएं।