शामली। 1300 हजार करोड़ की लागत से बनने वाले दिल्ली-देहरादून इकनॉमिक कॉरिडोर की तीन-ए (अधिसूचना, सर्वे एवं सुनवाई) और तीन-डी (मुआवजा निर्धारण) की कार्रवाई पूूरी हो गई है। पंचायत चुनाव के बाद अगले दो माह में जिला प्रशासन को मुआवजा राशि मिल जाएगी। इसके बाद वितरण शुरू हो जाएगा। बागपत से लेकर सहारनपुर जिले के गणेशपुर चौक तक इस छह लेन के एक्सप्रेस-वे की टेंडर प्रक्रिया शुरू हो गई है। 22 मार्च को आनलाइन टेंडर खुलेगा।
भारत माला योजना के तहत छह लेन के दिल्ली- देहरादून इकनॉमिक कॉरिडोर एक्सप्रेस हाईवे प्रस्तावित किया गया है। दिल्ली के अक्षर धाम से शुरू होकर बागपत में ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस हाईवे को जोड़ता हुआ बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर जिले से होता हुआ देहरादून तक जाएगा। छह माह पूर्व सरकार के केंद्रीय परिवहन मंत्रालय नई दिल्ली की ओर से इस इकनॉमिक कॉरिडोर की अधिसूचना जारी की गई थी। हाईवे के सक्षम अधिकारी एसडीएम सदर संदीप सिंह ने शामली जिले के 20 गांवों के किसानों की बैठक बुलाकर दो बार आपत्तियों की सुनवाई की थी।
सक्षम अधिकारी एसडीएम सदर संदीप सिंह ने बताया कि दिल्ली-देहरादून इकनॉमिक कॉरिडोर की अधिसूचना के बाद तीन-ए की कार्रवाई पर किसानों की सुनवाई करते हुए अपनी रिपोर्ट सरकार के केंद्रीय राज्य परिवहन मंत्रालय नई दिल्ली को भेज दी थी।
अभी तीन-ए पर सुनवाई की गई है। इसके बाद तीन-डी की सुनवाई होगी। किसानों की आपत्ति के बाद सुनवाई के दौरान शिकायत का निस्तारण किया जाएगा। अभी तक हाईवे की तीन-डी की अधिसूचना उन्हें प्राप्त नहीं हुई है। छह लेन के हाईवे में 35 गांवों को शामिल किए जाने की सूचना दी गई थी। बाद में बीस गांवों को शामिल किया गया है। लिसाढ़ और लांक गांव चकबंदी में शामिल हैं। इन गांवों को हाईवे से बाहर रखा गया है।
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22 मार्च को खोला जाएगा टेंडर
शामली। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण नई दिल्ली के जनरल मैनेजर एनसी मिश्रा के मुताबिक दिल्ली- देहरादून इकनॉमिक एक्सप्रेेेस हाईवे की तीन-ए और तीन-डी की कार्रवाई पूरी हो चुकी है। बागपत से सहारनपुर जिले के उत्तराखंड सीमा तक निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो गई है। आगामी 22 मार्च को आनलाइन टेंडर ओपन होंगे। अगले दो माह में मुआवजा जिला प्रशासन को प्राप्त हो जाएगा।
आपत्तियों का नहीं हुआ निस्तारण
शामली। गन्ना विकास परिषद के पूर्व चेयरमैन वीर सिंह मलिक ने बताया कि दिल्ली-देहरादून इकनॉमिक एक्सप्रेेेस हाईवे को लेकर आपत्ति दर्जकराई थी। हाईवे की जद में लांक से लेकर खेड़ी पट्टी गांव के 40-50 किसानों की लोई रजबहे के पास एक से डेढ़ किमी लंबाई तक जमीन है। एक तरफ रजबहे तथा दूसरी तरफ हाईवे हो जाएगा। बीच में बची जमीन पर जाने के लिए रास्ता तक नहीं है, न ही पानी की सुविधा है। किसान इस भूमि को हाईवे में शामिल करके मुआवजे की मांग कर रहे थे। मलिक के मुताबिक जन सुनवाई के दौरान सक्षम अधिकारी ने बैठक बुलाकर सर्वे कराकर निस्तारण करने का आश्वासन दिया था, अभी तक बैठक तक नहीं बुलाई है।