चीन से लौटी एमबीबीएस छात्रा पढ़ाई को लेकर चिंतित
शामली/कैराना। चीन में कोरोना वायरस फैलने के बाद लौटने वाले युवक और एमबीबीएस छात्रा चिंतित हैं। परिजनों ने स्पष्ट कर दिया है कि चीन से पूरी तरह वायरस खत्म होने के बाद ही उसे वहां भेजेंगे । उधर, कैराना के योग शिक्षक भी ऋषिकेश योग संस्थानों में काम करने के अलावा अपना खुद का सेंटर चलाने पर भी विचार कर रहे हैं।
आर्यपुरी निवासी किसान नवरतन सिंह डागर की बड़ी बेटी तन्नु चीन के जिलिन मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस कर रही है। उसका तीसरा साल है। तन्नु 11 जनवरी को कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से आठ दिन पहले ही चीन से कैराना आई थी। एयरपोर्ट पर ही उनके मोबाइल नंबर लिए गए थे। इसलिए वायरस फैलने पर स्वास्थ्य विभाग ने उससे फोन पर संपर्क किया। तन्नु ने बताया कि 15 दिन पहले वह बागपत जिले के खेकड़ा में अपनी मौसी के घर पर थी। खेकड़ा में ही पांच डाक्टरों की टीम ने उसकी मौसी के घर आकर उससे करीब दो घंटे तक काउंसिंलिग की। उधर, शामली के कुड़ाना गांव में चीन के वुहान से आए कुलदीप मलिक, विकास और रोहित मानेसर और दिल्ली में सरकारी चिकित्सकों की देखरेख के बाद कुड़ाना वापस आए थे। अब ये लोग यहां आकर योग शिक्षा का ज्ञान बांटने की तैयारी में हैं। दरअसल ये लोग ऋषिकेष में योग संस्थानों में शिक्षक का काम करने का मन बना रहे हैं। कुछ साथी दिल्ली या अन्य जगह पर अपना खुद का सेंटर खोलने पर विचार कर रहे हैं। अभी परिवार से सलाह मशविरा चल रहा है। क्योंकि चीन में अप्रैल तक अवकाश हो गया है। इसलिए अगले दो महीने तक ये लोग यहीं रहेंगे। इसके अलावा चीन में ही योग शिक्षा दे रहे मोहित ,रमन, अश्वनी, दीपक अंकित भी 18 जनवरी को वहां छुट्टियां पड़ने पर अपने गांव आ गए थे। ये लोग अब चीन के हालात सुधरने का इंतजार कर रहे हैं। तन्नु ने बताया कि उसके परिजन और सभी रिश्तेदारों ने उससे कहा है कि चीन से पूरी तरफ इस वायरस के खात्मे के बाद ही भेजेंगे। उधर, आठ दिन पहले ही जिलिन मेडिकल यूनिवर्सिटी में वी चेट ग्रुप मेसैंनजर से उसको जानकारी दी गई कि छुटिट्या 28 फरवरी से बढ़ाकर 17 अप्रैल तक कर दी गई हैं। अगर कोरोना वायरस पर हालात ठीक होते हैं तो 20 अप्रैल से यूनिवर्सिटी खुलेगी। अवकाश आगे बढ़ाने पर यूनिवर्सिटी द्वारा सूचित किया जाएगा।