शामली बोर्ड की हाई स्कूल परीक्षा में जिले में चौथा स्थान प्राप्त करने वाले अभिषेक अपने पापा के स?
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शामली। यदि अपनी मेहनत पर भरोसा हो। मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो आर्थिक तंगी भी आपका रास्ता नहीं रोक सकती। अपनी मेहनत के दम पर इसी तरह कई छात्रों ने बुलंदी हासिल की है। अपनी इसी खूबी से राज मिस्त्री और टायर पंचर लगाने वालों के बच्चों ने भी टॉपर्स लिस्ट में अपना नाम शुमार कराया है। एक निरक्षर राजमिस्त्री के बेटे कैराना के उवैश ने हाईस्कूल में जिले में दूसरा स्थान हासिल किया। वहीं बाबरी में टायर पंचर लगाने वाले के बेटे ने चौथा स्थान पाया। ऐसा नहीं कि ये बच्चे सिर्फ पढ़ाई तक सीमित रहे जरूरत पड़ने पर अपने पिता के साथ उनके काम भी भी सहयोग करते हैं।
राजमिस्त्री के बेटे उवैश का हाईस्कूल में दूसरा स्थान
कैराना। मोहल्ला आलकला कोतवाली के पीछे रहने वाले राजमिस्त्री इरफान अंसारी का छोटा बेटा उवैश बचपन में ही पढ़ाई के प्रति लगाव है। इरफान निरक्षर हैं। उनकी पत्नी भी पढ़ी लिखी नहीं है, लेकिन उनके बेटे की बचपन से ही पढ़ाई में विशेष रुचि है। शनिवार को हाई स्कूल परीक्षाफल में उवैश अंसारी ने साइंस साइड से 600 मेें से 544 अंक हासिल किए। 90.66 प्रतिशत अंक प्राप्त करके जिला शामली में दूसरा स्थान हासिल किया। उवैश की इस कामयाबी पर उवैश के पिता इरफान अंसारी, ताउ अख्तर हसन, चाचा डा अब्दुल सत्तार और मां तथा बड़ा भाई फरान बहुत खुश है। रिजल्ट आने पर उवैश के स्कूल एसएन इंटर कालेज के प्रधानाचार्य रफाकत अली ने उवैश के घर पहुंचकर उसको मिठाई खिला कर हौसला बढ़ाया। उवैश ने अपनी कामयाबी पर बताया कि माता पिता दोनो ही अनपढ़ है, लेकिन माता पिता की चाहत है कि उनका बेटा बड़ा होकर एक अच्छा डाक्टर बनकर गरीबों की सेवा करे। उसकी इच्छा पिता की इच्छा के साथ ही डाक्टर बनने की है। उसके चाचा अब्दुल सत्तार ने भी अलीगढ़ से एमबीबीएस फाइनल कर ली है। उसने इस मुकाम को हासिल करने के लिए मोबाइल इंटरनेट सोशल साइट्स का भी सहारा लिया था। वह अपनी कामयाबी का श्रेय अपने माता पिता व स्कूल प्रधानाचार्य रफाकत अली को देना चाहता है।
पढ़ाई के साथ पापा की दुकान पर टायर पंचर भी लगवाता है अभिषेक
बाबरी। बाबरी के लाला इंद्रप्रकाश इंटर कालेज के छात्र अभिषेक ने हाईस्कूल में चौथा नंबर हासिल किया है। उसने 537 अंक लिए हैं। अभिषेक के पिता गां व में एक छोटी सी टायर पंचर लगाने और साइकिल मरम्मत की दुकान करते हैं। आर्थिक हालत कमजोर है। लेकिन इसके बावजूद अभिषेक पढ़ाई के साथ समय समय पर पापा के काम में हाथ भी बंटाता है। हालांकि पापा मना करते हैं। बकौल अभिषेक वह पापा की दुकान पर भी बैठता है और पढ़ाई भी करता है। वह नियमित रुप से स्कूल जाता है। क्लास में जो टीचर की बताई चीज समझ नहीं आती उसे बार बार पूछता था। यदि क्लास में ही ढंग से मन लगाकर पढ़ा जाए तो ट्यूूशन की जरूरत नहीं पड़ती। परिवार में एक भाई सबसे छोटा और दो बहनें हैं।
प्रिंसिपल ने आकर दुकान पर दी खुशखबरी
अभिषेक के पिता ने बताया कि शनिवार दोपहर को कालेज के प्रधानाचार्य सतेंद्र त्यागी ने खुद उनकी दुकान पर आकर उनके बेटे की कामयाबी की खुशखबरी दी। बताया कि उनके बेटे ने हाईस्कूल में जिले में चौथा स्थान पाया है। उस वक्त उनका बेटा भी दुकान पर था। इसके बाद वह अपने बेटे को घर लेकर गए और जश्न मनाया। पूरा परिवार बेहद खुुश था।