कैराना। समाज सेवा सुधार कमेटी की ओर से कैराना में शहीदों की याद में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहीद-ए-आजम भगत सिंह के भतीजे किरणजीत सिंह, अशफाक उल्लाह खां के पौत्र अशफाक उल्लाह खां, कोतवाल धन सिंह के वंशज तस्वीर सिंह चपराना और नक्सली हमले में शहीद सचिन शर्मा के पिता सुरेंद्र शर्मा को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इन्होंने कहा कि शहीदों का जैसा सपना था, वैसा हिंदुस्तान बनना अभी बाकी है।
रविवार रात कस्बा कैराना में ईदगाह मैदान पर आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि स्वर्गीय हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह ने और विशिष्ट अतिथि विधायक चौधरी नाहिद हसन ने शमा रोशन करके किया। इस दौरान पंजाब से आए शहीद-ए-आजम भगत सिंह के भतीजे किरणजीत सिंह ने अपने चाचा की शहादत पर प्रकाश डाला।
कहा कि 1929 में ब्रिटिश हुकूमत ने अपना कानून लाने के लिए ताबड़तोड़ धमाके किए, तो मातृभूमि की रक्षा के लिए उन्होंने जंग छेड़ दी। महज 23 साल की उम्र में इंकलाब जिंदाबाद की आवाजें क्रांतिकारियों में अलग जोश कायम करती थी। कहा कि चाचा से घबराई ब्रिटिश हुकूमत ने उन्हें लाहौर की सेंट्रल जेल में सजा से एक दिन पहले ही फांसी पर लटका दिया था। शहीद होने से पहले भगत सिंह ने पिता को खत लिखा था कि हमारी शहादत आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत्र होगी। उनका मकसद था कि देश की आजादी और उसमें बराबरी का समाज बनें। लेकिन, अभी उनके सपनों का हिंदुस्तान बनना बाकी है।
कार्यक्रम में शाहजहांपुर से आए शहीद अशफाक उल्लाह खां के पौत्र अशफाक उल्लाह खां ने कहा कि अंग्रेजों ने तोपों से तबाह कर दिया। बारिश हुई, तो खून से तालाब भी लाल हो गया था। तब फैजाबाद से मौलाना अहमदुल्लाह शाह ने ब्रिटिश सरकार को ललकारा, तो हड़बड़ाई हुकूमत ने उन पर 50 हजार का इनाम घोषित कर दिया था। उस समय शाहजहांपुर से युद्ध लड़ा गया था। 1925 में पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, शहीद अशफाक उल्लाह खां के भाई ने अंग्रेजों को ललकारा। उस समय अशफाक उल्लाह खां जेल में थे। ब्रिटिश हुकूमत ने अशफाक उल्लाह खां को फांसी से बचने के लिए माफी मांगने को कहा, परंतु उन्होंने इंकार कर दिया और फांसी मंजूर की। इन्होंने भी मां के नाम खत लिखा था कि तुम्हारा बेटा फांसी का फंदा चूमने जा रहा है। मुल्क के लिए मेरे प्राण जा रहे हैं।
वहीं, कैराना से विधायक नाहिद हसन ने कहा कि मुझे ऐसा महसूस हो रहा है कि 23 साल की उम्र में शहादत देने वालों का फैसला राष्ट्रहित के लिए बहुत कुछ प्रेरणा देता है। हमें शहीदों पर फक्र होता है, जिनके प्रयास से देश को आजादी मिली। मासूम बालक रहमतुल्लाह कैरानवी ने मौलाना रहमतुल्लाह कैरानवी की शान में गजल पढ़ी। अध्यक्षता इस्माईल अंसारी और संचालन ब्रह्मपाल ने किया। समाज सेवा सुधार कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कार्यक्रम आयोजक अकबर अंसारी, थानाभवन ब्लॉक प्रमुख शेर सिंह राणा ने सभी का शुक्रिया अदा किया। इस मौके पर फजलुर्रहमान मुखिया, राशिद अंसारी, राधेश्याम गोयल, राजेश कुमार, पूर्व प्रधान आजाद, साजिद अंसारी और कारी महफूज ने विचार व्यक्त किए।
समूह बनाकर नाकाम कर दी थी चाल
कोतवाल शहीद धन सिंह के वंशज तस्वीर सिंह चपराना ने कहा कि अंग्रेजों ने हिंदू-मुस्लिम भावनाओं को तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर भडकाने का प्रयास किया था। तब मेरठ में कोतवाल धन सिंह ने 12 गांवों का समूह बनाकर अंग्रेजों की चाल नाकाम की थी। 1857 की क्रांति मेरठ से शुरू हुई थी। अंग्रेजों ने गांवों में तोप चला दी थी। इसमें 40-45 लोगों के मरने का जिक्र इतिहास में है। कैराना के लोग भी इस क्रांति में शामिल रहे थे। उधर, हाल में नक्सली हमले में शहीद हुए हरियाणा निवासी सचिन शर्मा के पिता सुरेंद्र शर्मा शहादत पर बोलते हुए भावुक हो गए। भाजपा नेता मृगांका सिंह ने कहा कि हमें सीमा पर रक्षा करने वाले जवानों के परिवारों का श्रद्धा के साथ ख्याल रखना चाहिए।