कैराना (झिंझाना)। मान्यता है कि बुद्ध पूर्णिमा पर यमुना नदी में स्नान करने से पापों से छुटकारा मिल जाता है, लेकिन यमुना नदी खुद ही बीमार हो गई है। सोमवार को बुद्ध पूर्णिमा पर हरियाणा और यूपी के श्रद्धालु यमुना नदी में स्नान करने पहुंचे, लेकिन वहां फैली गंदगी और नदी का काला देखकर मायूसी हाथ लगी, जिस कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को बगैर स्नान ही लौटने को मजबूर होना पड़ा।
सोमवार को बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर सुबह से ही हरियाणा और यूपी के श्रद्धालु यमुना में स्नान करने के लिए यमुना तट पहुंचे। कुछ ही श्रद्धालुओं ने यमुना नदी में स्नान करने के साथ पूजा अर्चना की तथा ब्राह्मणों को दान दक्षिणा देकर पुण्य लाभ कमाया। वहीं, पूर्व में बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर यमुना नदी किनारे विशाल मेला लगाया जाता था। इस बार हालात ठीक नहीं होने की वजह से दुकानें लगाने वाले भी हिम्मत नहीं जुटा पाए।
दुकानदारों को भी अंदेशा था कि नदी मैली होने के कारण ज्यादा संख्या में श्रद्धालु नहीं पहुंच पाएंगे, जिस कारण दुकान लगाने से कोई फायदा नहीं होगा। इसी कारण मेला नहीं लगाया गया। उधर, झिंझाना क्षेत्र में बिड़ौली पुल पर भी सोमवार को बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालु स्नान करने के लिए यमुना नदी पर पहुंचे, लेकिन नदी में फैला प्रदूषण और काला पानी देखकर श्रद्धालुओं को बगैर स्नान करे ही लौटना पड़ा। ग्रामीण ज्योति प्रसाद निवासी गांव शीतलगढ़ी ने बताया कि गत वर्ष हुई बारिश के बाद
यमुना का पानी सूखने के बाद अचानक पानी आने पर खुशी हुई थी। गर्मी में पानी आ गया है, लेकिन उक्त पानी का रंग काला व बदबूदार होने से यमुना के पहले से रुके पानी की मछलियां भी मर गई हैं। उक्त पानी हरियाणा के यमुनानगर स्थित फैक्ट्रियों से डाला जा रहा है। ग्रामीण नीरज, विकास, संजीव, रोहित, मोनू, मेहर सिंह ने बताया कि सोमवार को बुद्ध पूर्णिमा पर स्नान करने के लिए यमुना नदी पर पहुंचे, नदी में उतरने के बाद अहसास हुआ कि यह पानी तो बीमार कर सकता है।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
झिंझाना। यमुना नदी में काला और बदबूदार पानी आने से मछलियां भी मर रही हैं। इस कारण आसपास क्षेत्र में दुर्गंध भी फैल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि हरियाणा के यमुनानगर स्थित फैक्ट्रियों से निकलने वाले केमिकलयुक्त पानी को यमुना नदी में छोड़ा जा रहा है। चेतावनी दी है कि अगर शीघ्र ही यमुना नदी का पानी साफ नहीं किया गया, तो आंदोलन किया जाएगा।
यमुना नदी में पिछले काफी दिन से काले रंग का बदबूदार पानी आ रहा है। जिसके चलते नदी में रहने वाली मछली भी मर रही हैं और सड़ गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नदी का पानी अब पशुओं के पीने लायक भी नहीं रह गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन ने शीघ्र ही यमुना नदी में दूषित पानी गिरना बंद नहीं कराया और नदी स्वच्छ नहीं कराई गई, तो आंदोलन करने को मजबूर होना पड़ेगा।
ग्राम प्रधान म्यान कसबा आजाद सिंह, नरेश कौशिक, नरेंद्र, मदन सिंह, पहल सिंह, सुंदर, रामफल, धर्मपाल, आदेश, राजपाल, रमेश, सीताराम, ओमसिंह, कुलदीप सिंह, राज सिंह, राजकुमार और कदम सिंह आदि का कहना है कि यमुना नदी से आस्था
जुड़ी है, तो आसपास इलाके में सिंचाई के लिए भी महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा किसान अपने पशुओं को भी नदी पर ले जाते हैं, लेकिन दूषित पानी के कारण पशुओं में भी बीमारी फैलने का खतरा बन गया है। इसके अलावा आसपास के गांव में हैंडपंपों से भी दूषित पानी निकलने लगा है, जिस कारण बीमारियां फैलने की आशंका है।