शामली। पर्याप्त स्टाफ नहीं है, जांच के लिए मशीनें नहीं और देहात में भ्रमण के लिए मलेरिया विभाग के पास कोई वाहन नहीं है, जबकि डेंगू-मलेरिया के प्रकोप के लिहाज से जिले में 15 गांव अति संवेदनशील, 55 संवेदनशील श्रेणी में शामिल हैं। इन हालात में विश्व मलेरिया दिवस पर मलेरिया को जड़ से खत्म करने का सपना आखिर कैसे परवान चढ़ेगा, जबकि व्यवस्था खुद ही बीमार पड़ गई हो।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक ही जिले में बीते वर्ष 510 लोगों को मलेरिया हुआ, जबकि 10 मरीजों को डेंगू की पुष्टि हुई थी। हालांकि आंकड़ों की यह संख्या हकीकत से अलग है। कैराना, कांधला, ऊन, थानाभवन क्षेत्र में दिमागी बुखार, चिकनगुनिया, डेंगू, मलेरिया, वायरल के अलावा हेपेटाइटिस सी ने पांव पसार लिए थे।
कई लोगों की मौत भी इन बीमारियों के कारण हो चुकी हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पुराने ही ढर्रे पर चल रही है। मलेरिया और डेंगू के प्रकोप के लिहाज से संवेदनशील अतिसंवेदनशील गांवों में दवाई वितरण तथा जागरुकता कार्यक्रम के लिए एक जिला मलेरिया अधिकारी समेत महज पांच लोगों का स्टाफ है। डेंगू और चिकनगुनिया तक की जांच करने के लिए मशीन नहीं है।
उधर, जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विनय कुमार ने बताया किस्टाफ की कमी है, और जांच की सुविधा नहीं है, लेकिन फिर भी हम बेहतर करने का प्रयास कर रहे है। छिड़काव कराया जा रहा है। जागरूक किया जा रहा है।
जांच के लिए सहारनपुर का सहारा
जिले में डेंगू और चिकनगुनिया की जांच के लिए सुविधा नहीं है। पिछले साल भी इनकी जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग को खासी परेशानी उठानी पड़ी थी। मरीजों के ब्लड सैंपल को लेकर सहारनपुर, मेरठ तथा दिल्ली तक भेजा गया था। वहां से रिपोर्ट के आने के बाद ही इलाज प्रारंभ किया गया। इसके अलावा जिले में प्लेटलेटस चढ़ाने की भी सुविधा नहीं है। इस बार भी जिले में ऐसी कोई सुविधा नहीं मिली है।
बचाव का तरीका
1. रात में सोते समय मच्छर दानी का आवश्यक प्रयोग करें।
2. बच्चे पूरी बाजू के कपड़े पहनें, ताकि मच्छर न काट सके।
3. किसी भी पात्र में पानी भरा नहीं होना चाहिए
4. पानी रुका हुआ है तो उसमें मिट्टी का तेल या दवाई जरूर डाले
5. तेज बुखार होने पर तत्काल नजदीक चिकित्सालय में इलाज कराएं।
6. घरों के आस-पास गंदगी और कूड़ा एकत्र न होने दे।
ये है विभाग में स्टाफ की हालात
जिला मलेरिया अधिकारी डॉक्टर विनय कुमार, कृष्ण कुमार व दिनेश कुमार हेल्थ सुपरवाइजर, एक मलेरिया इंस्पेक्टर तथा एलए अवधेश वाडेकर ये है पूरे जिले की मलेरिया टीम। जबकि यहां पर पांच एलटी, तीन मलेरिया इंस्पेक्टर, कीट संग्रह कर्ता, पांच फील्ड वर्कर, तीन एसओडब्लू होने चाहिए। इसके अलावा विभाग के पास अपनी गाड़ी भी नहीं है।