शामली। सरस्वती शिशु विद्या मंदिर शामली में मकर संक्रांति कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रधानाचार्य संजय सैनी ने आचार्यों को बताया कि यह पर्व खिचड़ी पर्व के नाम से भी जाना जाता है। खिचड़ी समरसता का प्रतीक है। तिल और गुड़ भी मिलकर समरस बन जाते हैं। इसलिए यह त्योहार हमें सामाजिक समरसता का मार्ग भी दिखाता है।
बृहस्पतिवार को स्कूल में आयोजित कार्यक्रम का शुुुुभारंभ प्रधानाचार्य संजय सैनी और मुख्य वक्ता उप प्रधानाचार्य रविंद्र कुमार ने मां सरस्वती के सम्मुख पुष्पार्चन व दीप प्रज्वलन कर किया। उप प्रधानाचार्य रविंद्र कुमार ने बताया कि यह एक ऐसा पर्व है जो पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार विभिन्न प्रदेशों में विभिन्न नामों से पुकारा जाता है। यहां इस त्योहार को मकर संक्रांति के रूप में मनाते हैं। इस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करता है। महाभारत की घटना के अनुसार भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण में आने पर ही अपने प्राण त्यागे थे। इस त्योहार में तिल और गुड़ और खिचड़ी बनाने का बड़ा महत्व है।
मौके पर संगीत आचार्य सोमदत्त शर्मा, आचार्य योगेश कुमार, गोविल, आशीष जैन, सुनील कुमार, प्रवेश शर्मा, मांगेराम शर्मा, रवि गौड़, शिवकुमार धीमान आदि मौजूद रहे। मूंगफली रेवड़ी के प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।