शामली। कुष्ठ रोग का समय पर उपचार शुरू होने पर यह पूरी तरह ठीक हो सकता है। वर्ष 2025 में जिले में मिले 37 कुष्ठ रोगियों में से 16 मरीज नियमित इलाज के बाद पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग अभी भी कुल 21 कुष्ठ रोगियों का उपचार करा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से कुष्ठ उन्मूलन अभियान के तहत शुक्रवार से कुष्ठ पखवाड़ा जागरुकता अभियान की शुरुआत की जा रही है, जो 13 फरवरी तक चलेगा। अभियान के दौरान आशा और एएनएम कार्यकर्ता संदिग्ध लक्षण वाले मरीजों की पहचान करेंगी और उन्हें नजदीकी अस्पताल में उपचार के लिए भेजा जाएगा। सभी सरकारी अस्पतालों में कुष्ठ रोग का इलाज निःशुल्क उपलब्ध है।
एसीएमओ एवं जिला कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ. अथर जमील ने बताया कि यह बीमारी माइक्रो बैक्टीरियम लेप्रे नामक जीवाणु के संक्रमण से होती है। संक्रमित व्यक्ति के छींकने या खांसने से यह जीवाणु श्वसन नली के माध्यम से दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर सकता है। यह जीवाणु धीरे-धीरे शरीर में पनपता है और वर्षों बाद कुष्ठ रोग का रूप ले लेता है। यदि प्रारंभिक अवस्था में बीमारी की पहचान हो जाए तो एमडीटी (मल्टी ड्रग थैरेपी) से इसका सफल उपचार संभव है और दोबारा होने की संभावना भी समाप्त हो जाती है।
बताया कि अभियान का उद्देश्य लोगों को कुष्ठ रोग के प्रति जागरूक करना है। कुष्ठ रोग को लेकर किसी भी तरह की भ्रांति, अंधविश्वास या अफवाह पर ध्यान न दें।
कुष्ठ रोगियों के इलाज के लिए विभाग के पास पर्याप्त व्यवस्थाएं हैं। सभी मरीजों को दवाइयां और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
— डॉ. अथर जमील, जिला कुष्ठ रोग अधिकारी
मरीजों ने इस तरह दी कुष्ठ रोग को मात
केस–1
शहर के रेलवे रोड निवासी 52 वर्षीय बुजुर्ग ने बताया कि एक वर्ष पूर्व उन्होंने जिला अस्पताल में कुष्ठ रोग का उपचार शुरू कराया था। एंटीबायोटिक दवाओं और एमडीटी के नियमित सेवन के साथ समय-समय पर चिकित्सक को दिखाया, जिसका परिणाम यह रहा कि अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और किसी प्रकार की परेशानी नहीं है।
केस–2
कैराना क्षेत्र के कांधला रोड निवासी महिला ने बताया कि उन्होंने एक वर्ष पूर्व सीएचसी में कुष्ठ रोग का उपचार शुरू कराया था। नियमित रूप से दवाइयों का सेवन किया, जिससे अब वह पूरी तरह स्वस्थ हो चुकी हैं।
कुष्ठ रोग के लक्षण
त्वचा पर हल्के रंग के दाग-धब्बे होना
दाग वाले स्थान पर सुन्नता महसूस होना
सुन्न हिस्से पर बालों का झड़ना
हाथ-पैरों में झनझनाहट होना