शामली। जिला अस्पताल में आपरेशन के वक्त खराब हुआ लैप्रोस्कोप तो बहाना बन गया, जबकि असली मकसद मरीजों को टरकाना था। यदि डाक्टर चाहते तो वैकल्पिक व्यवस्था कराकर बेहोश हो चुकी महिलाओं के आपरेशन कर सकते थे, लेकिन किसी ने भी ऐसा करना मुनासिफ नहीं समझा। प्रकरण के सामने आने पर अब अधिकारी भी अपना पल्ला झाड़ने में लगे हुए हैं।
बृहस्पतिवार को शामली अस्पताल में नसबंदी के दौरान आपरेशन के वक्त लैप्रोस्कोप की लाइट खराब हो गई थी। जिसके बाद डाक्टरों ने बेहोश की गई महिलाओं को नसबंदी किए बगैर ही लौटा दिया, जिसे लेकर तीमारदारों ने हंगामा भी किया। दरअसल, शामली अस्पताल में चार लैप्रोस्कोप हैं, जिनमें से तीन खराब पड़े हुए हैं, एक से ही डॉक्टर काम चला रहे थे। बृहस्पतिवार को वह भी खराब हो गया। डॉक्टरों ने इसी को बहाना बनाते हुए बेहोशी की हालत में पड़ी महिलाओं को अस्पताल से टरका दिया था।
इससे पूर्व में अस्पताल में डॉक्टरों ने काम में लापरवाही बरती है। अस्पताल के ही कुछ डॉक्टरों ने यहां तक कह दिया कि यदि आपरेशन करना होता तो, सर्जन तत्काल नोडल को सूचना देते और कैराना या फिर कांधला से दूसरा लैप्रोस्कोप मंगवा सकते थे, जिसे मंगवाने में आधे से एक घंटा लगता, लेकिन डॉक्टरों द्वारा लैप्रोस्कोप नहीं मंगवाना इस मंशा को मजबूत कर रहा है कि उन्हें महज बहाना चाहिए था। बहरहाल पूरे प्रकरण में अभी तक सीनियर डॉक्टर भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
जिले में 11 लैप्रोस्कोप, छह खराब
जिले में कुल 11 लैप्रोस्कोप हैं। जिनमें से वर्तमान में छह खराब पड़े हुए हैं, पांच से काम लिया जा रहा है। लैप्रोस्कोप को ठीक करने के लिए लखनऊ से ही इंजीनियर आता है और इसके लिए बजट भी आता है, लेकिन अभी तक इनको ठीक करने के लिए कोई बजट नहीं आया है। हालांकि जिले में अभी एक ही टीम नसबंदी कर रही है, इसलिए लैप्रोस्कोप पर्याप्त हैं।
मामला संज्ञान में आया है, मै कल छुट्टी पर था, मुझे इसके बारे में नहीं बताया गया, यदि बताया गया होता तो दूसरे लैप्रोस्कोप का इंतजाम कैराना या फिर कांधल से करा लिया जाता - डॉ. सफल कुमार, एसीएमओ व नोडल परिवान नियोजन कार्यक्रम।