शामली जिले में पांच सीएचसी, दो पीएचसी और में 27 एंबुलेंस हैं, लेकिन सब कुछ राम भरोसे है। सीएचसी पर लैब हैं, लेकिन जांच नहीं होती। एक्सरे मशीन भी चार हैं, लेकिन एक्सरे सिर्फ दो ही सीएचसी पर होते हैं। पांचों सीएचसी पर 30-30 बेड हैं, लेकिन महकमे की इन हालतों के चलते शामली को छोड़कर सभी जगह बेड खाली पड़े रहते हैं।
शामली को जिला बने तीन साल हो गए, लेकिन अभी यहां स्वास्थ्य सेवाओं हाल बेहाल है। जिले में पांच सीएचसी शामली, कांधला, कैराना, थानाभन और झिंझाना हैं। इसके अलावा दो पीएचसी कुड़ाना और ऊन हैं जो कि छह-छह बेड की हैं। शामली सीएचसी को छोड़कर बाकि सभी स्थानों पर बेड खाली पडे़ रहते हैं। इसकी वजह सुविधाओं का टोटा है।
केवल नाम के लिए लैब
कांधला, कैराना, थानाभवन, झिंझाना सीएचसी पर पैथोलॉजी लैब तो हैं, लेकिन वहां पर मरीजों को सभी जांचों का फायदा नहीं मिल पाता। सीएचसी पर यूरीन टेस्ट, हिमोग्लोबिन, मलेरिया, एचआईवी और ब्लड शुगर की ही जांच हो पाती है। जबकि शामली सीएचसी ही इन सभी जांचों के साथ टीएलसी, डीएलसी, वीडीआर, हेपेटाइटिस बी की भी जांच की जा सकती है।
एक्सरे मशीन चार, पर टेक्नीशियन दो
शामली, कांधला, कैराना, थानाभवन सीएचसी पर एक्सरे की मशीनें तो हैं, लेकिन टेक्नीशियन मात्र दो ही हैं। यहां हर दिन एक्सरे नहीं हो पाते, इसके लिए बारी-बारी के हिसाब से और दिन निर्धारित कर मशीन चलाई जाती है। उधर, झिंझाना सीएचसी पर एक्सरे मशीन भी नहीं है। जिस कारण मरीजों को शामली ही आना पड़ता है।