थानाभवन। कथा व्यास राज राजेश्वर महाराज ने बालाजी धाम मंदिर में आयोजित सत्संग में कहा कि भगवान शंकर के दरबार में विविधता में एकता का भाव, दरबार में पशु पक्षी, जीव जंतु मानव दानव यक्ष गंधर्व किन्नर सर्प सभी के लिए सम्मान है। शंकर ही ज्ञान और वैराग्य के प्रतीक हैं।
कस्बा थानाभवन के बालाजी धाम मंदिर में मंगलवार को आयोजित सत्संग में कथा वाचक राज राजेश्वर महाराज ने कहा कि शंकर भगवान शमशान में वास करते हैं। श्मशान ज्ञान की भूमि है जहां सभी के लिए समता भाव है।
श्मशान का अर्थ है समान सम्मान सबको बराबर दृष्टि से देखना। न कोई बड़ा न कोई छोटा न कोई भेदभाव। उन्होंने कहा कि शंकर दरबार दर्शाता है कि घृणा और द्वेष भाव का अन्त करें जैसे चूहा, मोर, बैल, सांप, शेर एक दूसरे के प्राकृतिक शत्रु हैं लेकिन शिव दरबार में सब अपना प्राकृतिक बैर भाव भूलकर प्रेम से रहते हैं। इसी तरह मानव को भेदभाव भूलकर प्रेम से रहना चाहिए। समता का भाव रखोगे तो जीवन दिव्य बन जाएगा और मोक्ष की प्राप्ति होगी।
अपने परिवारों में द्वेष का अन्त कर आनंद का जीवन यापन करें। शिव का उपदेश है कि मानव को अपने सांसारिक कार्यों का निराकरण करते हुए उसमें आसक्त न होकर ईश्वर चिन्तन में चित्त को लगाएं। आयोजित सत्संग में विनय तायल, अजय, अशोक, दीपक, सचिन, विकास, सूरज, बिट्टू, कमलेश, सुनीता, सन्तोष आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।