शामली। दशलक्षण पर्व के 9वें दिन जैन संत विज्ञानसागर महाराज ने उत्तम अकिंचन धर्म का महत्व बताते हुए कहा कि संसार में सभी-कुछ उपलब्ध है, परंतु अकिंचन धर्म जल्दी सुलभ नही है। जीव को जैन संत के जीवन से प्रेरणा लेकर ऐसा ही जीवन जीना चाहिए।
शनिवार को तालाब रोड स्थित जैन धर्मशाला में श्री दिगंबर जैन साधु सेवा समिति की ओर से दशलक्षण पर्व के नौंवे दिन जैन संत विज्ञान सागर महाराज के सानिध्य में जबलपुर से आए पंडित राजेश जैन ने विधि विधान से इंद्र- इंद्राणियों को पूजा-अर्चना कराई। सौधर्म इंद्र राकेश जैन, संगीत जैन ने शांति धारा की। मौके पर अंकुर जैन, शिशिर जैन, मनी जैन, सौरभ जैन, ममता जैन ने चार कलश स्थापित किए। लक्ष्मी एंड ग्रुप ने भजनो की अमृत वर्षा करते हुए कहा - तुम्हें भक्ति की डोर से बांध लिया, तेरे चरणों में मन पर भजन पर श्रद्धालु झूम उठे। जैन संत विज्ञान सागर महाराज ने उत्तम अकिंचन धर्म का महत्व बताया।
कहा कि जीव को प्रतिदिन मंदिर जाने का नियम बनाना होगा। भगवान के दर्शन के बिना जीव को पानी नही पीने का सिद्धांत बनाना होगा। भगवान के दर्शन जीव के लिए सर्वोत्तम है, अगर जीव ऐसा नही कर रहे है। वह पाप कमा रहे है। जीव को हमेशा पांच बातें जिनमें मृत्यु, मृत्यु के बाद जीव के साथ कुछ नही जाएगा।
जैैसा कर्म करेगा वैैसे ही जीवन पाप पुण्य सामने आएगा। जहां जीव उलझता है, वही सुलझता है, जीवन में जीव को संतोष करना चाहिए। कर्म ही जीव का भाग्य बनाता है। पुरूषार्थी कर्म पर विजय पा सकता है। रविवार को सुबह सात बजे से दसवें धर्म उत्तम ब्रह्मचर्य के साथ दशलक्षण पर्व समाप्त होंगे। श्री दिगंबर जैन साधु सेवा समिति के अध्यक्ष जेके जैन, अनिल जैन, प्रवीण, अरुण जैन, सुुशील जैन, वीरेश जैन, सलेकचंद जैन, प्रोफेसर एमसी जैन, अखिलेश जैन, अरविंद जैन, सतेंद्र जैन आदि का सहयोग रहा।