सांसद दिल्ली में संसद के बाहर मीडिया से बात कर रही थीं। कहा कि नमाज इस देश में होती आई है और होती रहेगी। इसे कोई भी रोक नहीं सकता। हर मजहब का व्यक्ति सड़क पर उतरता है और 10 मिनट की नमाज में किसी को सिक्योरिटी कंसर्ट नहीं होती है तो 10 मिनट के लिए नमाज कराई जाए।
मुझे लगता है इसमें सुप्रीम कोर्ट को सज्ञान लेकर चीजें स्पष्ट करनी चाहिए। ये हमारा भी मुल्क है। लगातार जिस तरीके से यहां पर हमारे त्योहार मनाते आये हैं। इसे रोका जाएगा तो सभी को दुख होगा। इसी दुख में लोग कई बातें कह देते, लेकिन न हम डरेंगे न हम डराएंगे। नमाज भी होगी, त्योहार भी मनाएंगे कोई इसे रोक नहीं सकता।
लगातार 2014 के बाद से इस कगार पर देश को ये सरकार लेकर आई है, सिर्फ इन्होंने नफरत बोई है। जब इन्हें यूएई या कहीं और जाना होता है तो ये सभी को गले लगाते हैं, लेकिन अब अपने देश में सौगात ए मोदी की बात चल रही है तो मुसलमान के लिए सौगात की सबसे बड़ी बात ये है कि उनके हक हकूक को उनको दिया जाए।
युवा सांसद इकरा हसन ने दो टूक कहा कि ऐसी साैगाते हमें नहीं चाहिए! काली पट्टी बांधकर विरोध जताने के सवाल पर उन्होंने कहा कि विरोध जताया जा रहा है, हम इस विरोध के साथ हैं। ऐसे प्रशासनिक अधिकारी जिनके दिमागी संतुलन खराब हैं उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। मेरी छत पर मैं क्या करूं, ये किसी और को बताने का अधिकार नहीं है।
कहा कि पीएम मोदी लगातार साैगात दे रहे हैं, वक्फ बिल लाया गया, सर्वे के लिए टीमें भेजी गईं, अब ये नमाज पर रोक तो ऐसी साैगातों की हमें जरूरत नहीं है, मुस्लमान सम्मान और अधिकार चाहता है?