शामली के कैराना क्षेत्र में अपराध तो काफी समय से हो रहे हैं, मगर 2014 के बाद से जो हालात हुए, उनसे दहशत लगातार बढ़ती चली गई। सिलसिलेवार हुए अपराधों ने व्यापारियों को हिलाकर रख दिया। कैराना से पलायन का मुद्दा भी बढ़ते अपराध के कारण ही उठा।
कैराना में अगस्त 2014 में रंगदारी न देने पर तीन व्यापारियों की हत्या करने से जिले भर के व्यापारियों में आक्रोश पैदा हो गया था। 16 अगस्त को कैराना के व्यापारी विनोद की हत्या हुई, जिसके बाद 24 अगस्त को शिवकुमार और राजेंद्र की हत्या हुई। तब जिले भर के व्यापारियों ने आंदोलन किया।
व्यापारियों ने सामूहिक रूप से अपने प्रतिष्ठान बंद करके सांसद हुकुम सिंह को चाबियां भी सौंपने की बात कही थी। तब नेताओं से लेकर पुलिस प्रशासन भी व्यापारियों की इस पीड़ा को ठीक से समझ नहीं पाया था। वारदातों को अंजाम देने वाला मुकीम काला गिरोह भी पुलिस की पकड़ से दूर रहा, जिसका नुकसान यह हुआ कि उन वारदातों के बाद भी कैराना, कांधला और शामली में रंगदारी की धमकियां दी गई। यहां तक कि मुकीम काला के नाम पर छुटभैया बदमाशों ने भी रंगदारी के उद्देश्य से धमकाना शुरू कर दिया था।