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विकास की दौड़ में पिछड़ा कैराना, कारोबार चौपट

Mon, 26 Sep 2016 11:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
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Kairana getaway - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अमर उजाला ब्यूरो 
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कैराना।
रंगदारी की धमकी, व्यापारियों की हत्या और छेड़छाड़ के मामलों ने कैराना को बदनाम करके रख दिया। नेता राजनीति कर रहे हैं। बयानों की बौछार की जाती हैं, पर असल दिक्कतें नजरअंदाज हो जाती हैं। कैराना के लोगों के सीने में इस        बात की चुभन है कि यहां के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए नेताओं में जागृति क्यों नहीं आती।

विकास को तरजीह क्यों नहीं दी जाती। आखिर कब तक कैराना इसी तरह तंगहाली और बदहाली के  बीच सिसकता रहेगा। आलम यह है कि पानीपत रोड पर चार साल पूर्व करोड़ों की कीमत पर बनाए गए कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में पढ़ाई नहीं होती। भवन खंडहर बनने लगा है।
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विजय सिंह पथिक राजकीय महाविद्यालय के आवासीय परिसरों में खौफ के कारण ही अध्यापक रहना नहीं चाहते। पीएसी का डेरा महाविद्यालय परिसर में बन गया है। कैराना में पानीपत रोड पर तीतरवाड़ा चुंगी के पास एक         पेट्रोल पंप हुआ करता था। 17 साल पूर्व पेट्रोल पंप बंद हो गया। कैराना में तहसील और न्यायिक अदालतें होने और एक लाख से अधिक आबादी होने के बावजूद यहां कोई पेट्रोल पंप नहीं है। लोग हरियाणा से पेट्रोल लाते हैं।

महाविद्यालय में स्टाफ आवास बने खंडहर
विजय सिंह पथिक राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में करोड़ों की लागत से प्राचार्य आवास और छह शिक्षक आवास बनाए गए थे। गुंडागर्दी के खौफ के चलते प्राचार्य व शिक्षक इन भवनों में रहने को तैयार नहीं हैं। जिस कारण भवन खंडहर में तब्दील हो गए हैं। 


खौफ से वीरान बालिका आवासीय विद्यालय 
कुछ वर्षों पूर्व पानीपत रोड पर ग्राम पंजीठ के सामने कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के भवन का निर्माण कराया गया था। आठ दिन इस विद्यालय में कक्षाएं चलाई गई। लेकिन डर के चलते नए विद्यालय परिसर में स्टाफ रहने को तैयार नहीं हुआ। जिस कारण विद्यालय बाजार बेगमपुरा में अस्थायी भवन में चलाया जा रहा है। 

परिवहन और चिकित्सा की सुविधा नहीं
कैराना मे कोई बस अड्डा तक नहीं है। चुनाव के वक्त नेता आते हैं और बस अड्डा बनवाने के आश्वासन देकर चले जाते हैं। बसे सड़कों पर खड़ी होकर सवारियां उतराती व चढ़ाती हैं जिस कारण अक्सर जाम लगा रहता है।  एक लाख से अधिक की आबादी वाले कैराना में एक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र है। यह अस्पताल केवल नजला बुखार की दवाई तक ही सीमित है। कैराना तहसील होने के बावजूद यहां न तो कोई सर्जन है और न ही महिला      डाक्टर। एक्सरे मशीन तो है पर रेडियोलाजिस्ट नहीं है। प्रसव कराने          की जिम्मेदारी स्टाफ नर्स पर है। डाक्टरों के 12 पदों में से केवल 2 पदों          पर डाक्टर तैनात हैं।
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ग्राहकों को आने में लगता है डर
कैराना का व्यापार प्रभावित होने का सबसे बड़ा कारण है कि दूसरे शहरों के लोगों में धारना बन गई कि कैराना में गुंडा गर्दी का बोल बाला है। पहले कैराना में हरियाणा से बहुत ही ग्राहक खरीदारी करने आते थे। लेकिन कैराना अपराध व गुंडा गर्दी के कारण इतना बदनाम हो गया कि लोग यहां आने से डरते हैं। जिस कारण यहां का व्यापार प्रभावित हो गया है। इसके अलावा रात्रि में यहां परिवहन की सुविधा नहीं है। कैराना में 14 घंटे बिजली सप्लाई पास है। लेकिन यहा की विद्युत लाइनें इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि बार बार लाइनें टूट जाती हैं और लाइनें जोड़ने के लिए शट डाउन लेना पड़ता है जिस कारण यहां बिजली केवल 10 घंटे ही आती है। 

 
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