भले ही किशोरपुर गांव के रहने वाले किसान प्रभात कुमार सिर्फ हाईस्कूल तक पढ़े हैं, मगर वह अन्य किसानों के लिए किसी रोल मॉडल से कम नहीं है। वर्ष 2017 में धान की फसल में पेस्टीसाइड का प्रयोग करते समय दवाई प्रभात के शरीर पर गिर गई थी, जिसके कारण शरीर में कई दिन तक दिक्कत रही। डॉक्टरों से उपचार कराने के बाद राहत मिली। इसके बाद प्रभात ने ठान लिया कि वह पेस्टीसाइड के बजाए आर्गेनिक तरीके से खेती करेंगे और अन्य लोगों को भी आर्गेनिक सब्जियां, फसल और गन्ना उपलब्ध कराएंगे।
शामली के किशोरपुर गांव निवासी प्रभात ने बताया कि करीब एक साल तक 10 बीघा जमीन में मिर्च, गन्ना, घीया, धान, ज्वार आदि की खेती की मगर मुनाफा नहीं हुआ। इसके बावजूद प्रभात ने हिम्मत नहीं हारी और यूट्यूब व अन्य सोशल मीडिया पर वीडियो देखकर आर्गेनिक तरीके से गन्ना, मिर्च, धान, ज्वार की खेती शुरू की। जिसका असर यह हुआ कि जहां 10 बीघा में पांच साल से आर्गेनिक तरीके से गन्ना उगाया जा रहा है। वहीं, गन्ने से खुद ही फ्लेवर्ड गुड़ आदि तैयार कर बागपत, बिजनौर, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, दिल्ली के शाहदरा, हरियाणा के करनाल, सोनीपत, पानीपत, राजस्थान के भादरा, अलवर, हनुमानगढ़ में सप्लाई किया जा रहा है।
प्रभात के अनुसार, उसके गुड़ की बिक्री ऑनलाइन है। यही नहीं छह अन्य को भी रोजगार दिया हुआ है। अन्य किसानों को भी प्रभात निशुल्क आर्गेनिक खेती और गन्ना से खुद गुड़ तैयार कर मुनाफा कमाने के टिप्स दे रहे हैं।
प्रभात कुमार ने बताया कि उनके पिता संपत सिंह की कुछ समय पूर्व ही बीमारी के कारण मौत हो गई थी। आर्गेनिक खेती करने के लिए उन्होंने जहां सोशल मीडिया का सहारा लिया वहीं कृषि विभाग द्वारा आयोजित होने वाली गोष्ठियों में भी भाग लिया। उगाई गई फसल के सेवन से पशुओं, गन्ने और गुड़ से मनुष्य को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो, इसके लिए जीवामृत और जैविक खाद को गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़, दाल के आटे, मिट्टी और पानी को एक साथ मिलाकर तैयार किया गया। जीवामृत न केवल सस्ता है, बल्कि यह पौधों और मिट्टी दोनों के लिए फायदेमंद है।
प्रभात ने बताया कि वे खुद ही गन्ना उगाकर गुड़ तैयार करते हैं, जिसमें सॉप, काजू, बादाम वाले आर्गेनिक गुड़ की दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा में अधिक डिमांड है। दिल्ली में आर्गेनिक तरीके से तैयार गन्ना भी बेचा जाता है। हर सीजन में 35 क्विंटल से अधिक गुड़ सप्लाई किया जा रहा है। किसान को कृषि विभाग के अधिकारी भी कई बार सम्मानित कर चुके हैं।