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गर्मी में हाल हुआ बेहाल, अब तो बस गांव पहुंचने की जल्दी

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कब आएगी बस : शामली बस स्टैंड पर बैठी प्रवासी महिला श्रमिक। - फोटो : SHAMLI
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प्रवासी श्रमिकों ने सुनाई आपबीती
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गर्मी में हाल हुआ बेहाल, अब तो बस गांव पहुंचने की जल्दी
रोहित अग्रवाल
शामली। लॉकडाउन में फैक्टरी बंद हुई तो रोजगार छिन गया। कई दिनों तक फैक्टरी वालों ने मदद की। कुछ दिन जमा पूंजी से काम चला। अब तो रोटी को भी तरस गए हैं। श्रमिक और उनके बच्चों का हाल काफी बुरा है। कोई चारा नहीं बचा तो पैदल ही गांव की ओर निकल गए। पंजाब में लॉकडाउन के बाद काम नहीं मिलने से परेशान होकर बेबसी का सफर कर रहे श्रमिकों का हाल एक जैसा ही है। इसी तरह और प्रवासी श्रमिकों को अब बस अपने घर पहुंचने का ही इंतजार है। पेश है रिपोर्ट
अब तो बस गांव ही पहुंचना है
पंजाब से शामली बस स्टैंड पहुंचे सुल्तानपुर के कृष्ण कुमार की गोदी में एक साल की बेटी थी। पत्नी साथ थी। तीनों पसीनों से तरबतर थे। लाइन में लगे कृष्ण कुमार ने अपना आधार कार्ड दिखाया। स्क्रीनिंग के बाद अपने जिले की बस के इंतजार में परिवार के साथ बैठ गया। बोला अब तो बस अपने गांव ही पहुंचना है।
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अपने गांव में कोई पूछेगा तो सही
आजमगढ़ के गांव टांडी निवासी रामहित का परिवार के सात लोग शामली बस स्टैंड पहुंचे। एक चार साल का बच्चा भी था। स्टैंड के पास सड़क पर ही सामान रखा। एक दो सदस्य अपने आधार कार्ड आदि कागजात लेकर लाइन में लग गए। एक साल का मासूम इतना थका था कि वो सूटकेस पर लेटकर ही सो गया। परिजनों ने बताया कि रात भर चले थे। बच्चा रास्ते में दूध मांग रहा था, मगर कहीं नहीं मिला। एक गांव में कुछ लोगों ने उन्हें रोटी जरूर खिलाई। बोला साहब शहर वालों ने तो मुंह मोड़ लिया अब अपने गांव ही जाएंगे। लखीपुरखीरी के सुभाष सहित 13 लोग पानीपत की धागा फैक्टरी में काम करते थे। लॉकडाउन में फैक्टरी बंद हो गई। कुछ दिन जमा पूंजी से काम चलाया। एक दूसरे के पास जो जमा था खर्च हो गया। अब सबकी जेब खाली है। वहां कई जगह गांव जाने का साधन पूछा मगर किसी ने कुछ नहीं बताया। चार दिन पहले मजबूरी में पैदल ही निकल गए। दो दिन तो रोटी भी नसीब नहीं हुई। रास्ते में कुछ गांव वालों ने रोटी खिलाई।
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योगी जी से उम्मीद
कानपुर निवासी 48 साल के विनय मिश्रा पानीपत में इलेक्ट्रिक कार्य करते थे, लेकिन लॉकडाउन के बाद किसी फैक्टरी में काम नहीं मिला। खाली हो गए। जमा पूंजी खत्म हो रही थी। वहां से कानपुर लौटने के लिए प्रयास किए, लेकिन कोई रास्ता नहीं मिला। शनिवार को पता चला कि यूपी में योगी जी बस से प्रवासियों को भेज रहे हैं। इसलिए पानीपत से पैदल चलकर यहां आ गया। बस किसी तरह अपने घर बच्चों के पास पहुंच जाऊं।

शामली रोडवेज बस स्टैंड पर स्क्रीनिंग के बाद कागजी कार्रवाई पूरी कराता युवक और उसकी बेटी। गर्मी म?- फोटो : SHAMLI

पता नही कब नंबर आएगा : शामली रोडवेज बस स्टैंड पर अपना आधार कार्ड लेकर नंबर की प्रतीक्षा करता श्रम?- फोटो : SHAMLI

शामली बस स्टेंड पर बैठा प्रवासी श्रमिक।- फोटो : SHAMLI

शामली में झिंझाना के अहमदगढ़ शेल्टर हाउस से घर जाने का इंतजार करती बच्ची।- फोटो : SHAMLI

घर अब आएगा : यह महिला झिंझाना में बनाए गए शेल्टर हाउस में दिए गए प्रसाद को बच्चे को दिखाते हुए शायद - फोटो : SHAMLI

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