मुठभेड़ में मारा गया एक लाख का इनामी फुरकान। फाइल फोटो
कैराना (शामली)। वर्ष 2014 में व्यापारी विनोद सिंघल की हत्या के बाद पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने फुरकान का आतंक खत्म करने में पूरे 12 साल लग गए। इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि पुलिस जब-जब उसके करीब पहुंची, या तो भाग निकला या फिर किसी पुराने मुकदमे में अपनी जमानत तुड़वाकर जेल पहुंच गया। यही कारण रहा कि लंबे समय तक पुलिस उसे कानून के दायरे में लाने के बावजूद उसके आपराधिक नेटवर्क को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकी।
विनोद सिंघल हत्याकांड के बाद फुरकान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वांछित अपराधियों में शामिल हो गया था। वह लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा। वर्ष 2017 में प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद अपराधियों के खिलाफ अभियान तेज हुआ तो फुरकान भी पुलिस के निशाने पर आ गया।
8 नवंबर 2017 को जहानपुरा में रंगदारी वसूलने पहुंचे फुरकान की सूचना तत्कालीन एसपी अजय पाल शर्मा को मिली। कांधला रोड पर पुलिस ने उसकी घेराबंदी की और मुठभेड़ में उसकी टांग में गोली लगी। इसे जनपद का पहला चर्चित हाफ एनकाउंटर माना गया। वह जेल भेजा गया, लेकिन जमानत मिलने पर फिर अपराध की दुनिया में लौट आया। पुलिस से बचने के लिए फुरकान ने अपना तरीका भी बदल लिया। उसने रंगदारी की आड़ में ड्रग्स तस्करी का नेटवर्क भी खड़ा कर लिया। पुलिस को चकमा देने के लिए वह लगातार ठिकाने बदलता रहा।
8 नवंबर 2021 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कैराना पहुंचे तो व्यापारियों ने फुरकान के आतंक का मुद्दा उठाया। पुलिस ने उसकी तलाश तेज की तो फुरकान 9 नवंबर 2021 को एक पुराने मुकदमे में अपनी जमानत तुड़वाकर खुद जेल चला गया। जेल से बाहर आने के बाद भी फुरकान पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सका। आखिरकार 5 अगस्त को वह पुलिस की घेराबंदी में आ गया और पुलिस ने उसका आतंक खत्म किया। संवाद