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सोशल साइट पर प्रत्याशियों की चुनावी पिच तैयार कर रहे आईटी के धुरंधर

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सोशल साइट पर प्रत्याशियों की चुनावी पिच तैयार कर रहे आईटी के धुरंधर
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शामली। कोरोना काल में चुनाव प्रचार का तरीका पूरी तरह बदल गया है। नेताजी घर-घर जाकर हाथ जोड़ने के साथ मोबाइल- लैपटॉप के माध्यम से भी वोट मांग रहे हैं। वर्चुअल रैली, फेसबुक लाइव, वाट्सएप और सोशल साइट के जरिए नेताजी का चुनाव प्रचार जोर शोर से चल रहा है। कोरोना काल में ये प्रचार इतना भी आसान नहीं है। सोशल साइट पर चुनावी पिच तैयार करने में आईटी के धुरंधर दिनरात लगे हैं। ये प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार की रणनीति तैयार कर रहे हैं। 60 फीसदी बजट ऑनलाइन व 40 फीसदी ऑफलाइन प्रचार-प्रसार में खर्च किया जा रहा है। ऐसे में चुनाव से जुड़े कारोबारियों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
सोशल मीडिया पर ट्रेंड कराए जा रहे प्रत्याशी
इस चुनाव प्रत्याशियों को सोशल साइट पर ट्रेंड कराने का ठेका आईटी एक्सपर्ट ले रहे हैं। डिजिटल मार्केटिंग के जरिए नेताओं का प्रचार करने वाली एजेंसियां फेसबुक, व्हाटासएप, ट्वीटर, इंस्टाग्राम, मैसेजिंग और वॉयस मैसेजिंग के जरिए माहौल बना रही हैं। सोशल साइट पर इन्हें ट्रेंड कराया जाता है। वह फेसबुक पेज से लेकर अन्य माध्यमों के लाइक व शेयर की गणित संभालते हैं। ऑटो जेनरेट, ई-मेल, ऑटो जेनरेट वायरस मैसेज, आटो जेनरेट वाट्सएप मैसेज की सुविधा दी जाती है। संसाधन नेताओं की तरफ से ही मुहैया कराया जाता है, बाकी काम तो कांट्रेक्ट पर ही होता है।
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नेताओं के रिकार्डेड संदेश की डिमांड
एसएमएस और ऑडियो मैसेज की इस चुनाव में बड़ी डिमांड है, क्योंकि नेताओं का संदेश सभी तक एक क्लिक में पहुंच जाता है। ऐसे प्लेटफार्मों के जरिए ही पार्टी के प्रत्याशियों का मुद्दा हर तबके के लोगों तक पहुंचाने के लिए पहले ही प्रचार एजेंसियों से ठेका हो जाता है।
90 के दशक में कद्दावार नेता तैयार करते थे गणित
कई चुनाव देखने वाले ताना गांव निवासी चौधरी महक सिंह बताते हैं कि सोशल मीडिया का ट्रेंड काफी बढ़ गया है। पहले तो कद्दावर नेता ही चुनाव की गणित तैयार करते थे। वह नेताओं को सलाह देते थे और उस पर चुनावी तैयारी होती थी। यही कारण है कि पहले के नेताओं के आसपास पुराने और अनुभवी नेताओं की फौज होती थी लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब तो सोशल मीडिया की बड़ी फौज सभी नेताओं की होती है। अब नेताओं के आसपास ऐसे ही युवा दिखते हैं जो आईटी के एक्सपर्ट होते हैं।
कारोबार पर पड़ा है काफी फर्क
टेंट कारोबारी व मैरिज होम संचालक रजनीश नामदेव का कहना है कि पहले चुनाव में जगह-जगह सभाएं हुआ करती थी। लाउडस्पीकर से प्रचार होता था। अब कोरोना काल में प्रचार-प्रसार में डिजिटल प्रचार अधिक होने लगा है। जिससे हमारे कारोबार पर काफी फर्क पड़ा है।
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फोटोग्राफरों की होती थी काफी अहमियत
फोटोग्राफर रामनाथ का कहना है कि पहले के चुनाव में फोटोग्राफरों की काफी अहमियत होती थी। प्रत्याशी कई दिन पहले फोटोग्राफरों को अपने साथ प्रचार-प्रसार के दौरान साथ रहने की बुकिंग कर लेते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होता है। अब तो अधिकतर प्रत्याशियों के फोटो मोबाइल से ही लिए जाते हैं।
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