संविधान का दिया हवाला
सांसद इकरा हसन ने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता देता है। ऐसे में किसी एक समुदाय को विशेष रूप से निशाना बनाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर विभिन्न धर्मों के लोग समय-समय पर अपने धार्मिक कार्यक्रम करते हैं, जिन्हें समाज में सामान्य रूप से स्वीकार किया जाता है।
दो मिनट की नमाज पर आपत्ति क्यों
इकरा हसन ने कहा कि नमाज़ पढ़ने में अधिक समय नहीं लगता। उनका कहना है कि कुछ ही मिनटों में नमाज़ अदा कर ली जाती है, ऐसे में इसे लेकर विवाद खड़ा करना उचित नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह अन्य त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान सड़कों पर कार्यक्रम होते हैं और किसी को आपत्ति नहीं होती, उसी तरह नमाज़ को भी उसी दृष्टि से देखा जाना चाहिए।