चैंपियन ट्रॉफी के फाइनल में भारत- न्यूजीलैंड के बीच हरियाणवी और वेस्ट यूपी की ठेठ भाषा में कमेंट्री करने वाले अंतरराष्ट्रीय अंपायर अनिल चाैधरी आईपीएल के दाैरान कमेंट्री करते नजर आएंगे। उनके इस अंदाज को खूब प्रशंसा मिल रही है। अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत के कुछ अंश।
हाल ही में हुई चैंपियन ट्रॉफी के फाइनल में भारत- न्यूजीलैंड के बीच हरियाणवी, वेस्ट यूपी की देहाती बोलचाल में कमेंट्री कर क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीतने वाले अंतरराष्ट्रीय अंपायर और कमेंटेटर शामली के डांगरौल गांव के अनिल चौधरी का जीवन संघर्षों से भरा रहा। उन्होंने पड़ोसी को देखकर क्रिकेट खेलना शुरू किया था। इसके बाद वह अब तक 140 अंतरराष्ट्रीय मैचों, 226 आईपीएल मैचों में ऑन फील्ड, टीवी, फॉर्थ अंपायर की भूमिका निभा चुके हैं। अब आईपीएल आगामी 22 मार्च से शुरू होने वाले आईपीएल में भी हरियाणवी और वेस्ट यूपी की बोलचाल में कमेंंट्री करते नजर आयेंगे।
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संवाददाता ने उनसे फोन पर बातचीत की। उनके संघर्ष की कहानी से लेकर क्रिकेट में आए बदलाव को लेकर की गई बातचीत के प्रमुख अंश....
प्रश्न: आप अंपायर से लेकर कमेंट्री में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कैसे पहुंचे, क्या चुनौतियां रही? जवाब: पिता स्व. बलजोर सिंह वॉलीबॉल के जिला स्तरीय खिलाड़ी रहे हैं। पड़ोसियों को देखकर क्रिकेट खेलना शुरू किया था। दिल्ली में ए डिवीजन तक क्रिकेट खेला। कई मैच भी यूपी की टीम को जिताए। वर्ष 1989 के आसपास दिल्ली में प्रदीप गुप्ता की जगह मुझे अंपायरी करने के लिए भेजा गया। इनाम के तौर पर 100 रुपये मिले। इसके बाद कई मैचों में कमेंट्री की। उस समय कुछ लोग परिजनों को ताने देते थे कि अंपायरी में कोई भविष्य नहीं, उसे वापस बुला लो, कुछ नहीं कर पाएगा, मगर परिजनों ने हौंसला बनाए रखा। थाईलैंड से लेकर दुबई और अन्य स्थनों पर 140 अंतरराष्ट्रीय मैचों में अंपायरी की जबकि 226 आईपीएल मैचों में भी अंपायरी कर चुका हूं। अब ताने देने वाले ही मिलने के लिए तरसते हैं।
प्रश्न: कमेंट्री में आपकी देहाती बोलचाल को काफी पसंद किया जा रहा है, यह आईडिया आपके दिमाग में कहा से आया? जवाब : आज के समय में लोग हरियाणा, वेस्ट यूपी की देशी बोलचाल को अधिक पसंद करते हैं। इसलिए मैंने कमेंट्री में अब 90 प्रतिशत हरियाणवी, 10 प्रतिशत शामली, बागपत, मुजफ्फरनगर समेत वेस्ट यूपी की बोलचाल रखी है, जिसे काफी पसंद किया जा रहा है।
प्रश्न: अब क्रिकेट में किस तरह की चुनौतियां बढ़ी है? जवाब: अब टैक्नॉलोजी आ गई है। कंपीटिशन भी बढ़ा है। पहले एक ही तरह का क्रिकेट होता था ,अब वनडे के साथ-साथ टी-20, टेस्ट क्रिकेट होता है।हर तरह के क्रिकेट में खिलाड़ी को खुद को ढालना बड़ी चुनौती है।
प्रश्नन: अंपायर, कांमेंटेटर के लिए क्या चुनौतियां है? जवाब : सबसे बड़ी चुनौती अंपायर का फिट होना है। अब तीन तरह की गेंदों से मैच होता है। रात और दिन में गेंद को देखना, निर्णय सटीक लेना चुनौतीपूर्ण होता है। अंपायर खुद को फिट रखें। कांमेंटेटर को भाषा का ज्ञान होना बहुत ही जरूरी है।
प्रश्न: वर्तमान भारतीय टीम को लेकर क्या कहेंगे? जवाब : भारतीय टीम बेहतरीन फाॅर्म में चल रही है। रोहित से लेकर विराट कोहरी, हार्दिक, रविंद्र जड़ेजा सभी फाॅर्म में है। यदि इसी तरह चलता रहा तो भारतीय टीम विश्व कप उठाएगी।
प्रश्न: युवाओं को कोई संदेश? जवाब : अंपायर या फिर कांमेंटेटर बनने के लिए ट्रेनिंग लेना बहुत ही जरूरी है वरना आगे नहीं बढ़ पायेंगे। माइक्रोफोन कैसे पहनना, कब और कितना बोलना, नियमों का पता होना जरूरी है। मैंने युवाओं के लिए सोशल मीडिया पर एक प्लेटफाॅर्म शुरू किया है, जिसमें उन्हें अंपायर और कमेंट्री के टिप्स दिए जायेंगे।
कई बार किए जा चुके सम्मानित
अनिल चौधरी वर्ष 1998 में बीसीसीआई में अंपायर के पद पर तैनात हुए थे। अच्छा प्रदर्शन करने पर कई बार बेस्ट अंपायर अवार्ड ऑफ दा ईयर चुना जा चुका है।
भाई हरेंद्र क्रिकेटर सहवाग, आशीष नेहरा के साथ खेल चुके
अनिल ने बताया कि उनके छोटे भाई हरेंद्र चौधरी रणजी के अच्छे खिलाड़ी रहे हैं। वह क्रिकेटर आकाश चोपड़ा, शिखर धवन, वीरेंद्र सहवाग, आशीष नेहरा, शिखर धवन आदि के साथ खेल चुके हैं। अब वह इंग्लैंड में परिवार समेत रह रहे हैं।