फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शरदकालीन गन्ने में टॉप बोरर की बीमारियों के बचाव की दी जानकारी

विज्ञापन
विज्ञापन
शामली। हरियाणा के करनाल जिले से गन्ना प्रजनन संस्थान से आए वैज्ञानिकों की टीम ने बृहस्पतिवार को छह गांवों के किसानों के गन्ने के खेतों का निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने बताया कि गन्ने की फसलों में 50 प्रतिशत से अधिक तक टोपर बोरर फैल चुका है।
विज्ञापन

बृहस्पतिवार को हरियाणा के करनाल जिले से गन्ना प्रजनन संस्थान से आए वैज्ञानिकों की टीम में शामिल कीट विशेषज्ञ डॉ. एसके पांडे और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रविंद्र कुमार और जिला गन्ना अधिकारी विजय बहादुर सिंह के साथ ऊन चीनी मिल क्षेत्र के नाई नंगला के किसान अमित कुमार, कमालपुर के सुमित, बिडौली के राजकुमार, केरटू के माहीराम व ओमपाल, गागोर के शिवकुमार, सहदेव, रामवीर, पिंडौरा के आशीष, राजेंद्र, विवेक और चीनी मिल फार्म के खेतों में गन्ना फसल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के समय वैज्ञानिकों ने सभी किसानों को पेडी और शरदकालीन गन्ने में टॉप बोरर बीमारियों के बचाव के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि गन्ने की फसल में टोप बोरर खेतों में लगभग 50 से 60 प्रतिशत है। माईट, थ्रीप्स, ब्लैक का का प्रकोप भी दिखाई दिया है। ऐसे में सभी किसान इस रोग की रोकथाम के लिए ईमिडा क्लोरोपिड 300 मिली को 300 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ घोल तैयार कर गन्ने की फसल पर छिड़काव करें। कोराजन, फरटेरा व फ्यूराडॉन का प्रयोग आवश्यकतानुसार करें। डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि को 0238 प्रजाति कीट व बीमारियों से अधिक प्रभावित हो गई है। इसलिए को 15023, को 13235 व 0118, 14201 जैसी प्रजातियों की बुआई करें। जो किसानों और चीनी मिल को गन्ना प्रजाति की प्राथमिकता के आधार पर बुआई करें। भ्रमण के समय वैज्ञानिकों के साथ मिल के इकाई प्रमुख अवनीश चौधरी, डॉ. विजय माली, बलराज सिंह, लवप्रीत सिंह और चीनी मिल गन्ना विकास विभाग स्टाफ मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें