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अनोखा है भारत का लोकतंत्र, ऐसी दूसरी मिसाल नहीं

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शामली। लोकतंत्र यानी जनता का, जनता के लिए और जनता द्वारा शासन। यहां जनता ही सब कुछ होती है। जनता को अपने प्रतिनिधि चुनने की स्वतंत्रता होती है। सामाजिक और आर्थिक विषमताओं के बावजूद भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यह बात अलग है कि समय के साथ लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में कुछ खामियां आईं और इसी वर्ष जारी हुई 2019 की वैश्विक लोकतंत्र सूचकांक सूची में भारत दस पायदान नीचे आकर 51वें नंबर पर रहा। इसके बावजूद भारतीय लोकतंत्र जैसी मिसाल कहीं नहीं मिलती। प्रस्तुत है भारत में लोकतंत्र की स्थिति पर राजनैतिक दलों एवं राजनीति शास्त्र के विशेषज्ञ से बातचीत...
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विविधताओं को एक सूत्र में पिरोता है लोकतंत्र
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधीर पंवार कहते हैं कि भारतीय लोकतंत्र की विशेषता है कि इसमें हर अमीर-गरीब, दलित, पिछड़े एवं अल्पसंख्यक, सभी की भागीदारी शामिल है। यह विविधताओं को एक सूत्र में पिरोता है। हर व्यक्ति के वोट की कीमत समान है, लेकिन इसमें कुछ कमियां भी आईं हैं। जिन्हें लेकर सुप्रीम कोर्ट तक से टिप्पणियां की गईं। वह कहते हैं कि लोकतंत्र से धैर्य खत्म हो रहा है। चुनाव जीतने के लिए लोगों को बांटा जा रहा है। लोग अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं तो उसे दबाने का प्रयास किया जाता है।
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लोकतांत्रिक मान्यताओं को बचाना जरूरी
रालोद के वरिष्ठ नेता सत्यवीर पंवार कहते हैं कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था सबसे बड़ी और मजबूत है, लेकिन इसमें कमियां आने लगी हैं। वह पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि उन्होंने बिना किसी भेदभाव के काम किया। आज राजनीति जाति-बिरादरी के नाम पर होने लगी हैं लेकिन चौधरी साहब ने हमेशा किसानों की बात की। एक बार वे विरेंद्र सिंह, कृष्णपाल मलिक आदि के साथ चौधरी चरण सिंह से मिलने गए तो वे बीमार थे। हर कोई बीमारी की स्थिति में अपने घर-परिवार की चिंता करता है लेकिन चौधरी साहब ने कहा था कि इस देश का क्या होगा।
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लोकतंत्र का सबसे बड़ा उदाहरण तो यही है कि एक सामान्य परिवार का बेटा आज देश का प्रधानमंत्री है। यदि लोकतंत्र मजबूत न होता तो यह संभव नहीं था। भारत का इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है। हर नागरिक को लोकतंत्र से ही उसके अधिकार मिल पाए हैं लेकिन इसमें कुछ कमियां भी आ गईं हैं। वह देश में चुनाव सुधार की जरूरत बताते हैं। चुनाव में धन, बल के प्रयोग पर प्रभावी रोक की वकालत करते हैं। - प्रोफेसर डॉ. प्रताप सरोहा, राजनीति विज्ञान, वीवी डिग्री कॉलेज
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