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-परमार्थ और प्रभु भक्ति भागवत का मर्म : स्वामी ओमानंद महाराज

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कैराना क्षेत्र के गांव पिंजोखरा गांव में श्री मद्भा भागवत कथा के शुभारंभ पर बोलते शुकदेव आश्रम श - फोटो : SHAMLI
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परमार्थ और प्रभु भक्ति भागवत का मर्म : स्वामी ओमानंद
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शामली। भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम शुकतीर्थ के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद ने कहा कि भक्ति की शक्ति भागवत से मिलती है। दुष्प्रवृतियों को नष्ट करने से ही जीवन कल्याण संभव है।
शुक्रवार को पंजोखरा गांव के प्राचीन शिव मंदिर में कथा वाचक अरविंद दृष्टा की श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ करते हुए स्वामी ओमानंद ने कहा कि जीवन में चिंतन, सत्य विश्लेषण, प्रभु भक्ति और परमार्थ ही भागवत का मर्म है। भागवत जहां आत्मबोध के साथ जीवन जीने की कला सिखाती है, वहीं सामाजिक बुराइयां तथा दुष्प्रवृत्तियों को दूर करती है। भागवत कृष्ण भक्ति का भी सर्वोत्तम साधन है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अंचल में शिक्षा के प्रति अभिभावक जागरूक बने। बच्चों को रोजगारपरक और मूल्यपरक शिक्षा मिलेगी, तभी देश की उन्नति होगी। जन सहयोग से पंजोखरा क्षेत्र में बेटियों की उच्च शिक्षा को डिग्री कालेज की स्थापना की जाए। शिक्षा ऋषि वीतराग स्वामी कल्याणदेव के जीवन से प्रेरणा लें।
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पूर्व मंत्री एवं एमएलसी वीरेंद्र सिंह ने कहा कि कथा के श्रवण से ग्रामीणों को संस्कृति जानने और गुणों को ग्रहण करने कर मार्ग मिलेगा। विधि-विधान से पूजा- अर्चना के उपरांत कथा व्यास अरविंद दृष्टा का स्वामी ने सम्मान किया। आचार्य सुमन कृष्ण शास्त्री, यज्ञमान इसम सिंह, पीतम सिंह चैन पाल, जितेंद्र चौहान, रमेश चंद आदि मौजूद रहे।
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