कैराना (शामली)। शामली के 32 गांवों के किसानों की लगभग 60 हजार बीघा भूमि वन विभाग द्वारा अपने नाम करने के प्रयास के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने सोमवार से तहसील परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। किसानों ने सुनरवाई नहीं होने पर तहसील कार्यालय में ताले लगाने की चेतावनी दी है। देर शाम एसडीएम के आश्वासन के बाद किसानों ने धरना समाप्त कर दिया।
सोमवार को धरने पर यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कपिल खटियान ने कहा कि किसान वर्षों से अपनी जमीन जोत रहे हैं और दो बार चकबंदी भी हो चुकी है। यदि यह भूमि वन विभाग की थी, तो उस समय विभाग कहां था। उन्होंने चेतावनी दी कि भारतीय किसान यूनियन किसानों की जमीन किसी भी कीमत पर वन विभाग को नहीं देने देगी और किसी भी उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं करेगी।
भाकियू के जिला अध्यक्ष शान्ता प्रधान ने कहा कि वन विभाग ने किसानों की जमीन हड़पने के लिए मुकदमे दायर किए और बिना जानकारी के अपने पक्ष में मुकदमे जीत लिए। उन्होंने कहा कि वन विभाग की मनमानी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और किसान अपने हक के लिए हर संभव कदम उठाएंगे।
धरने के दौरान सांसद इकरा हसन ने कहा कि सरकार उद्योगपतियों को जमीन दे रही है, जबकि किसानों से उनकी जमीन छीनी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा सड़क से संसद तक उठाया जाएगा।
भाकियू नेता गौतम पवार ने चेतावनी दी कि यदि वन विभाग किसानों की जमीन छीनने की कोशिश करता है तो कैराना को दिल्ली के गाजीपुर की तरह आंदोलन स्थल बना दिया जाएगा। देर शाम एसडीएम निधि भारद्वाज किसानों के बीच पहुंची। एसडीएम में आश्वासन दिया कि पठेड और बल्हेडा गांव के किसानों की खतौनी रुकी हुई थी, अब उन्हें खतौनी मिल जाएगी।इसके बाद भारतीय किसान यूनियन ने धरना समाप्त कर दिया।
भाकियू के संगठन मंत्री जाहिद, इंतजार प्रधान, ब्रह्मपाल नाला, पप्पू भारसी, विदेश मलिक, गय्यूर हसन, पुष्कर सैनी, मेहरदीन, मिंटू सैनी, इनाम सहित दर्जनों पदाधिकारी और किसान मौजूद रहे।