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गन्ने के अभाव में 12 घंटे ही चल पाई मिल

Sun, 06 Nov 2016 12:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
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suger mill - फोटो : amar ujala
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थानाभवन। बजाज हिंदुस्तान शुगर मिल का पेराई सत्र पांच दिन पूर्व शुभारंभ होने के बावजूद मिल गन्ने के अभाव में 12 घंटे ही चल पाई। मिल ने पांच लाख क्विंटल गन्ने के इंडेंट जारी करने पर भी मात्र 67 हजार क्विंटल गन्ना ही मिल में पहुंचा है। सरकार द्वारा गन्ना रेट घोषित न करने के कारण जारी इंडेंट पर गन्ने का भाव अंकित नहीं होने पर गन्ना किसान मजबूरी में गन्ना डाल रहे हैं। 
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बजाज हिंदुस्तान शुगर मिल का पेराई सत्र का शुभारंभ दो नवंबर को हवन पूजन के साथ हो गया था। मिल द्वारा दो नवंबर को इक्यावन हजार गेट, चालीस हजार सेंटर व तीन नवंबर के लिए एक लाख गेट व चालीस हजार सेंटर के इंडेंट जारी किए थे, लेकिन मिल में 2192 क्विंटल गन्ना ही आया था।

तीन व चार नवंबर को मिल ने डेढ़ लाख गेट व 90 हजार सेंटर के इंडेंट जारी होने के बावजूद मिल में 67 हजार क्विंटल गन्ना ही पहुंचा मिल की पेराई क्षमता 90 हजार कुंतल है।
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मिल इन पांच दिनों में मात्र 12 घंटे ही चल पाई। गन्ने के अभाव में मिल बंद है। गन्ना महाप्रबंधक जेबी तोमर ने बताया प्रारंभ में गन्ना कम आने के कारण नो केन में मिल बंद है। गन्ना आवक धीरे धीरे बढ़ रही है मिल शीघ्र ही सुचारु रूप से चलेगी जितना गन्ना आता है उतनी पेराई उसी समय कर रहे हैं। 

उधर प्रदेश सरकार ने विगत तीन वर्षों से गन्ने का रेट एक रुपया भी नहीं बढ़ाया उल्टे चीनी मिल मालिकों को राहत देते हुए किसानों को किश्तों में गन्ना भुगतान करने की छूट दे दी थी। मिल ने किसानों को पहले 240 की दर से भुगतान किया बाद में 40 रुपये की दर से दूसरी किश्त में भुगतान किया। जिसका अभी भी करोड़ों रुपया किसानों का मिल की ओर बकाया है। 

इस नये सत्र का शुभारंभ तो हो गया, लेकिन प्रदेश सरकार ने गन्ने का रेट घोषित नहीं किया। मिल द्वारा जारी इंडेट पर भी गन्ना मुल्य अंकित नहीं है। 
किसान विजेंद्र प्रधान, यासीन अहमद, राजूठाकुर, विरेंद्र सिंह, शमशाद अहमद, भूट्टू प्रधान, जयहिंद, चयनसिंह, अजयवीर त्यागी, अंबरीश त्यागी आदि का कहना है गत वर्ष की भांति दो किश्तों में गन्ना मूल्य न आ जाए। सरकार को मिल चलवाने से पूर्व गन्ना रेट घोषित करना चाहिए। किसानों की मजबूरी है बिना रेट घोषित हुए उसे अपना गन्ना मिल में डालना पड़ रहा है। जबकि उसने गत वर्ष के गन्ने का पूरा भुगतान भी मिल ने नहीं किया है। 
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