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Shamli News: सही समय पर लक्षणों की पहचान, ऑटिज्म का समाधान

Sat, 09 May 2026 12:06 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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शामली। बच्चों में ऑटिज्म की समस्या सामने आ रही है। जिला अस्पताल के मनकक्ष में हर महीने दो-तीन केस सामने आ रहे हैं। अगर दो से तीन साल तक के बच्चों में ऑटिज्म के लक्षणों की पहचान कर ली जाए तो इस समस्या का समाधान हो सकता है। देरी से पहचान होने पर यह समस्या जटिल हो सकती है।
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मनकक्ष में नियुक्त क्लीनिकल साइक्लॉजिस्ट प्रेरणा पुंडीर ने बताया कि ऑटिज्म कोई बीमारी न होकर न्यूरो डेवलपमेंटल विकार है। इसमें दिमाग अलग तरह से बच्चों में जानकारी को समझने और लोगों से जुड़ने में कठिनाई होती है। इससे पीड़ित बच्चों के सामाजिक व्यवहार, बातचीत और सीखने की क्षमता प्रभावित होती है। इसके लक्षण आमतौर पर पहले तीन वर्षों में खासतौर से दो से तीन साल में दिखाई देने लगते हैं। उनका कहना है कि इस तरह के लक्षण अगर नजर आए तो सबसे पहले बाल रोग विशेषज्ञ को बच्चों को दिखाकर परामर्श लें। इसके बाद न्यूरोलॉजिस्ट व मनोचिकित्सक से सलाह ले। इस समस्या का निदान स्पीच थेरेपी, स्पेशल एजुकेटर, बिहेवियर थैरेपी व ऑक्यूपेशनल थेरेपी आदि से होता है। अभिभावकों को इसमें लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए और लक्षण नजर आते ही चिकित्सकों की सलाह से निदान कराना चाहिए।
लक्षण :
- आंखों को न मिलाना
- नाम पुकारने पर कोई प्रतिक्रिया न देना, बुलाने पर न सुनना
- दोहराव वाला व्यवहार और रुचि सीमित होना।
- सामाजिक संवाद में कमी व किसी को दोस्त न बनाना
- अपनी भावनाएं व्यक्त न करना, जरूरतें न बताना।
- एक ही तरह की गतिविधियों या शब्दों को बार-बार दोहरना।
- देरी से बोलना, तेज आवाज, रोशनी या गंध के प्रति ज्यादा संवेदनशील होना
मनकक्ष में इस तरह से आ रहे केस
केस एक : मनकक्ष में सात वर्षीय बालक को लेकर पहुंचे अभिभावक ने बताया कि उसे किसी दूसरे से कोई मतलब नहीं होता। वह अपने आप में रहता है और एक ही हरकत बार-बार करता है।
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केस दो : मनकक्ष में पांच वर्षीय बालक को लेकर उसका पिता पहुंचा। उसने बताया कि बालक देर से बोलता है। हाथों को घुमाता रहता है और किसी दूसरे से आंख नहीं मिला पाता।
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