चौसाना। अजीजपुर गांव के प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल गांव की राजनीति की भेंट चढ़ रहे हैं। अव्यवस्थाओं का स्कूल में अंबार है। छात्र-छात्राओं को शौच के लिए खेतों में जाना पड़ता है। काफी समय से बच्चों को मिड डे मील नहीं बंट रहा है। स्कूल के रसोईघर में पुरानी ईंटें और कचरा भरा है।
चौसाना क्षेत्र के गांव अजीजपुर में प्राथमिक, जूनियर हाईस्कूल एक ही परिसर से संचालित होते हैं। प्राथमिक स्कूल में 112 बच्चों पर तीन अध्यापक तथा जूनियर हाईस्कूल में करीब 40 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं, जिन्हें पढ़ाने की जिम्मेदारी दो अध्यापकों पर है। दोनों ही स्कूलों के बच्चों को शौच के लिए खेतों का रुख करना पड़ता है। हालांकि स्कूल में दो शौचालयों का निर्माण कराया गया है, लेकिन अभी तक उनको इस्तेमाल में नहीं लाया गया है। स्कूल के प्रधानाध्यापक भी विभागीय अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों को समस्याओं के बारे में पत्र भेजकर अवगत करा चुके हैं।
स्कूल में सफाई कर्मी की कोई व्यवस्था नहीं है। अध्यापक और बच्चों को ही सफाई करनी पड़ती है। अध्यापकों का आरोप है कि स्कूल में मिड डे मील की कोई व्यवस्था नहीं है। अध्यापकों ने बताया कि ग्राम प्रधान द्वारा स्कूल में मिड डे मील नहीं बनने दिया जा रहा। चावल आते हैं तो दाल नहीं आती, फल और दूध तो बच्चों को कभी मिला ही नहीं।
वहीं, ग्राम प्रधान कमलेश देवी के पति सतीश कुमार का कहना है कि अध्यापक गांव का ही होने के कारण राजनीति कर रहे हैं। स्कूल में शौचालयों को निर्माण कराया गया है। बालिकाओं के लिए बनने वाला शौचालय अभी निर्माणाधीन है। मिड डे मील पर प्रधानपति ने बताया कि एक सप्ताह का सामान स्कूल में जाता है लेकिन स्कूल अध्यापक मिड डे मील बनवाकर अपने
घर ले जाते हैं।
स्कूल में अपनी मर्जी से आते हंै बच्चे
जूनियर हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक पुष्पेंद्र सिंह का कहना है कि अजीजपुर मुस्लिम बहुल गांव है। यहां के बच्चे पहले मदरसे में जाते हैं, जिसके बाद मन किया तो स्कूल में चले आते हैं। अभिभावकों के साथ बैठक कर समस्या का समाधान करने का प्रयास किया गया, लेकिन व्यवस्था नहीं सुधर सकी। उधर, अध्यापक पुष्पेंद्र का आरोप है कि स्कूल के बच्चे इसलिए स्कूल में झाड़ू लगाते हैं, क्योंकि गांव का सफाई कर्मी स्कूल में सफाई करने के लिए नहीं आता है। प्रधान से बात कर सफाईकर्मी को सप्ताह में सिर्फ एक बार सफाई कराने का आग्रह किया गया, लेकिन सफाईकर्मी प्रधान के घर पशुओं को नहाता है।
रसोई माताओं से स्कूल में होता है भेदभाव
प्रधान के पति के अनुसार दोनों ही स्कूलों में पांच रसोई माता कार्यरत हैं। जिसमें से एक रसोई माता अनुसूचित जाति से है। आरोप है कि स्कूल के अध्यापक उनसे जातिगत भेदभाव करते हुए स्कूल में झाड़ू लगवाते हैं। अध्यापक स्कूल में राजनीति को जन्म दे रहे है।
एबीएसए को शौचालयों की जानकारी नहीं
एबीएसए मनोज राय का कहना है कि गांव अजीजपुर के स्कूल में मिड डे मील की शिकायत मिल रही थी , जिस पर ग्राम प्रधान से बात करके समस्या का समाधान कराया गया है। पीने के पानी और शौचालयों की समस्या उनके संज्ञान में नहीं है। अगर समस्या है कि बीडीओ से बात कर शौचालयों का निर्माण जल्द पूरा कराया जाएगा।