शामली। कैराना-खतौली मार्ग और दिल्ली सहारनपुर हाईवे को जोड़ने वाली मखमूलपुर से डांगरोल गांव तक रजबहा पटरी मार्ग का चार किलोमीटर का हिस्सा तीन साल से जर्जर हालत में है। गन्ना सीजन शुरू होने के बाद किसान इस मार्ग को लेकर परेशान है। यह रजबहे की पटरी 12 गांवों को जोड़ती है।
12 किमी लंबी रजबहा पटरी छोटे और मध्यम स्तरीय वाहनों के लिए मिनी बाईपास का काम करती है। बलवा गांव की सीमा से लेकर जसाला गांव की सीमा तक यह सही स्थिति में है, लेकिन मखमूलपुर गांव से लेकर भीसा और डांगरोल गांव तक चार किमी का हिस्सा बेहद खस्ताहाल है। खस्ताहाल मार्ग पर वाहनों के आवागमन के लिए डाले गए ईंट के रोडे और परेशानी बढ़ा रहे हैं। पिछले तीन सालों में ग्रामीणों की शिकायतों के बाद भी इस मार्ग की मरम्मत और नवीनीकरण सिंचाई विभाग नहीं करा पाया है।
बोले ग्रामीण
गन्ने की बुग्गी का जर्जर मार्ग पर चलना कठिन
डांगरौल निवासी सतीश कुमार जावला ने बताया कि गन्ने का पेराई सीजन चालू हो चुका है। खस्ताहाल रजबहे की पटरी से गन्ने की बुग्गी व अन्य वाहनों का चलना कठिन हो रहा है।
रास्ता बदलकर जाते हैं ग्रामीण
मखमूलपुर निवासी जोनी मलिक का कहना है कि रजबहे की पटरी क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण लोगों को रास्ता बदलकर जाना पड़ता है।
सुन्ना गांव निवासी गौरव मलिक का कहना है कि कांधला और बुढ़ाना जाने के लिए सुन्ना रजबहा पटरी एक मात्र रास्ता है। ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किसान दिवस में उठाया था क्षतिग्रस्त पटरी का मुद्दा
डांगरोल निवासी राजन जावला का कहना है कि जर्जर पटरी के नवीनीकरण का मुद्दा तत्कालीन डीएम रविंद्र सिंह, मौजूदा डीएम अरविंद चौहान के समक्ष किसान दिवस में उठा चुके हैं, लेकिन अभी तक रजबहे की पटरी का नवीनीकरण नहीं हो पाया है।
2025 में सिंचाई विभाग से मिलेगा बजट
पूर्वी यमुना नहर के उप राजस्व अधिकारी अंबुज चौधरी का कहना है कि किवाना गांव में ईंट भट्ठों के भारी वाहन रजबहे की पटरी से होकर गुजरते है। जिस कारण यह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। सिंचाई विभाग को सड़क निर्माण के लिए तीन साल में धनराशि मुख्यालय से अवमुक्त होती है। वर्ष 2025 में सिंचाई विभाग लखनऊ से धनराशि अवमुक्त होने के बाद जर्जर हिस्से का निर्माण कराया जाएगा।
रजबहे की पटरी से जुडे गांव
बलवा, ब्रहमखेड़ा, मीमला, जसाला, मतनावली, पुन्ना, डांगरोल, भभीसा, हुरमजपुर, सुन्ना, किवाना व रसूलपुर गुजरान