शामली। नोट बंदी को लेकर मची हाय तौबा में उद्योग जगत को भारी झटका लगा है। बाजार से सामान की डिमांड नहीं आ रही, तो कच्चा माल भी मिलना मुश्किल हो गया है। पेपर मिल से लेकर स्टील उद्योग, सभी पर इसका असर दिखाई दे रहा है। 12 दिन के अंदर ही उद्यमियों को करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है। फैक्ट्रियां बंदी के कगार पर पहुंच गई हैं।
आठ नवंबर की रात प्रधानमंत्री नरेंद्री मोदी ने पांच सौ और एक हजार रुपये के नोटबंदी का निर्णय देशवासियों को सुनाया। इसके बाद से ही छोटे व्यापारियों ने पुराने नोट लेने बंद किए, तो उद्यमियों के सामने भी विपदा खड़ी हो गई। पेपर मिलों को कच्चा माल (वेस्ट पेपर) नहीं मिल पा रहा। क्योंकि वेस्ट पेपर कबाड़ियों से खरीदकर ठेकेदार फैक्ट्रियों को सप्लाई करते हैं। फैक्ट्री संचालक उन्हें चेक से भुगतान तो करा रहे हैं, मगर बैंक से निर्धारित रकम ही निकल पाने की वजह से मजदूरों से खरीदे गए वेस्ट पेपर का भुगतान नहीं हो पा रहा। वहीं, पेपर मिलों में बायलर चलाने के लिए खोई और लकड़ी की सप्लाई भी प्रभावित हो गई है।
यही हालत स्टील उद्योग की है। स्क्रैप मिलना बंद हो गया। बाजार से माल की डिमांड नहीं हो रही है, जिस कारण उत्पादन भी घट गया है। अधिकांश
उद्यमियों का कहना है कि नोट बंदी के कारण 50 से 70 प्रतिशत तक उत्पादन घट गया है। फैक्ट्रियों में माल स्टाक हो गया है, जिससे कारोबार बुरी तरह प्रभावित हैं।
बीते 12 दिन के अंदर उद्योग जगत को करोड़ों रुपये का फटका लगा है, जिसकी भरपाई करना मुश्किल है। क्योंकि बाजार में नई करेंसी की किल्लत और डिमांड घटने की वजह से फिलहाल बाजार पटरी पर लौटता नजर नहीं आ रहा है।
बंद करनी पड़ेगी मशीन
वेस्ट पेपर मिल नहीं रहा। हमारी फर्म का 70 प्रतिशत तक उत्पादन घट गया है। 30 से 40 लाख रुपये कीमत का वेस्ट पेपर और बायलर चलाने के लिए रॉ मेटिरियल की खरीद की जाती थी, मगर नोट बंदी के बाद से महज 30 प्रतिशत वेस्ट पेपर ही मिल रहा है। हमारी फैक्ट्री में दो मशीनें हैं, एक मशीन सोमवार से बंद करनी पड़ेगी। - राजेश्वर बंसल, संचालक, मारूति पेपर मिल।
फिलहाल मंदी है, पर निर्णय सही
नोट बंदी के कारण स्क्रैप मिलना कम हो गया है। हमारी स्टील यूनिट पिछले छह दिन से बंद है। फुटकर में सरिया और अन्य लोहे की खरीद भी कम हो गई है। फिलहाल नोट बंदी से 40 प्रतिशत कारोबार कम हो गया है, मगर उम्मीद है कि जल्दी ही स्थिति ठीक हो जाएगी। नोट बंदी का निर्णय लेकर प्रधानमंत्री ने एतिहासिक कदम उठाया है, हम उनके साथ हैं। - अशोक बंसल, संचालक शामली स्टील।
कई महीने तक ठीक नहीं होगी हालत
नोट बंदी की वजह से मंदी का दौर है। ज्यादातर कारोबार कैश से होता था, जो बंद हो गया है। बाजार से माल की डिमांड नहीं आ रही है, जिस कारण उत्पादन भी घटाना पड़ गया है। 50 प्रतिशत कारोबार घट गया है। जिसे ठीक होेने में कई महीने लगेंगे। - नरेंद्र अग्रवाल, आईआईए के चेयरमैन एवं
नवीन आयरन फाउंड्री के संचालक
80 प्रतिशत कम हो गया कारोबार
बाजार में करेंसी नहीं है, तो माल की डिमांड भी घट गई है। सिर्फ 20 प्रतिशत ही कारोबार बचा है। 12 दिन के अंदर करीब एक करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। मजदूरों की सैलरी निकालना भी मुश्किल हो गया है। - जैके जैन, संचालक, कलश रिम-धुरे उद्योग
बंदी के कगार पर है फैक्ट्रियां
हमारी फैक्ट्री में प्लास्टिक के डिस्पोजल गिलास बनाए जाते हैं। बाजार से कच्चा माल नहीं मिल रहा है तथा डिमांड भी घट गई है। इस कारण 60 प्रतिशत कारोबार घट गया है। अमूमन सभी फैक्ट्रियों का यही हाल है। - अंकित गोयल, प्रदेश उपाध्यक्ष, पश्चिमी उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल