शामली। लोकसभा चुनाव को लेकर जिले में सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सत्ताधारी पार्टी हो या फिर विपक्ष सभी ने लोगों के बीच जाकर पार्टी की उपलिब्धयां गिनाना शुरू कर दिया है। भाजपा से लेकर सपा, रालोद और अन्य दलों में दावेदारों की सूची प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। अभी तक देखा जाए तो प्रोफेसर से लेकर मैनेजर, एलएलबी पास युवा और पूर्व विधायक लोकसभा चुनाव के दंगल में कूद चुके हैं।
कैराना लोकसभा सीट की यदि बात की जाए तो इसमें सहारनपुर की तहसील गंगोह और नकुड़ विधानसभा भी आती है। यहां पर 18 लाख से अधिक वोटर हैं। राजनीतिक दृष्टिकोण से यह सीट काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। यही कारण है कि सभी दलों के नेताओं ने लोकसभा चुनाव के लिए बिगुल बजा दिया है। कांग्रेस और सपा कार्यकर्ता जहां गांव-गांव में जाकर सभाएं और यात्राएं निकाल रहे हैं। वहीं भाजपा ने भी गांवों में जनसंपर्क अभियान चलाया हुआ है।
सभी दलों के संभावित प्रत्याशियों ने सोशल मीडिया पर भी गतिविधियां तेज कर दी हैं। किसी भी कार्यक्रम से लेकर गतिविधियों की फोटो और वीडियो को फेसबुक, इंस्टाग्राम पर शेयर किया जा रहा है ताकि उनके साथ अधिक से अधिक लोग जुड़ सकें। हालांकि, सभी दलों को अभी प्रत्याशी घोषित होने का इंतजार है।
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सत्ताधारी और विपक्षी पार्टियों के लोग चुनाव मैदान में कूदने को तैयार
भाजपा से सांसद प्रदीप चौधरी, एलएलसी वीरेंद्र सिंह के बेटे मनीष चौहान भी दावेदारों की लाइन में हैं। मनीष चौहान पूर्व में एक बार जिला पंचायत अध्यक्ष रहे हैं, उनकी शैक्षिक योग्यता बीए एलएलबी है। पूर्व एमएलसी सुरेश कश्यप भी दावेदारों की दौड़ में हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष तेजेंद्र सिंह निर्वाल का कहना है कि अभी दावेदारों का पता किया जा रहा है। इसके बाद ही रिपोर्ट हाईकमान को भेजी जाएगी।
रालोद जिलाध्यक्ष चौधरी वाजिद अली ने बताया कि उनके अलावा नवाजिश आलम, पूर्व विधायक राव वारिश आदि टिकट के दावेदारों में शामिल हैं। इनमें नवाजिश आलम बीए पास हैं और गढ़ीपुख्ता के भारत इंटरनेशन स्कूल समेत कई स्कूलों में मैनेजर के पद पर तैनात हैं। इसी तरह पूर्व विधायक राव वारिस एलएलबी पास हैं। खुद चौधरी वाजिद अली भी दौड़ में हैं।
इसके अलावा सपा के कैराना लोकसभा प्रभारी प्रो़ सुधीर पंवार भी दौड़ में हैं, जो लखनऊ विवि में जूलॉजी के प्रोफेसर हैं। सपा के विधायक नाहिद हसन की बहन इकरा हसन भी तैयारी में जुटी हैं। इकरा ने इंग्लैंड से एलएलबी की हुई है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष दीपक सैनी ने बताया कि पार्टी को टिकट के लिए उनके नाम के अलावा मधु सैनी, सुभांगी अग्रवाल का ब्योरा भेजा गया है। मधु सैनी बीए जबकि सुभांगी एमए पास हैं।
आप के जिलाध्यक्ष सोराम सिंह का कहना है कि अभी जिले में पार्टी का कोई भी संभावित प्रत्याशी सामने नहीं आया है। हाईकमान जिसे भी टिकट देगा, उसे मजबूती के साथ चुनाव लड़वाकर जिताने का कार्य किया जाएगा। हालांकि, बसपा से अभी किसी का नाम सामने नहीं आया है।
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गांव-गांव दस्तक दे रहे संभावित प्रत्याशी
जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव की तारीख नजदीक आती जा रही है, संभावित प्रत्याशियों ने भी जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया है। प्रत्याशी विभिन्न गांवों में जाकर पार्टी की उपलिब्धयां गिनाते हुए अपने पक्ष में वोट की अपील लोगों से कर रहे हैं।
कैराना लोकसभा सीट का इतिहास
कैराना लोकसभा सीट के इतिहास को देखें तो कैराना के हसन परिवार से वर्ष 1984 में चौधरी अख्तर हसन कांग्रेस से पहली बार सांसद बनकर राजनीति में उभरे थे। चौधरी अख्तर हसन के बेटे ने वर्ष 1996 में कैराना लोकसभा सीट से सपा से चुनाव जीतकर अपने पिता की राजनीति विरासत को संभाला था। सांसद मुनव्वर हसन लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा, विधान परिषद के सदस्य रहे हैं। वह वर्ष 2004 में मुजफ्फरनगर से लोकसभा चुनाव से सपा-रालोद गठबंधन में सांसद चुने गए। वर्ष 1999 मेें सपा से कैराना लोकसभा चुनाव लड़े, मगर भाजपा के दिग्गज नेता व पूर्व राज्यपाल वीरेंद्र वर्मा के सामने चुनाव हार गए थे। मुनव्वर हसन के निधन के बाद उनकी विरासत को उनकी पत्नी तबस्सुम बेगम ने वर्ष 2009 में संभाला। बसपा से वह पहली बार कैराना लोकसभा चुनाव मेें भाजपा प्रत्याशी हुकुम सिंह को हराकर सांसद चुनी गईं।