शामली। जिले में हेपेटाइटिस के मरीज बढ़ रहे हैं। हर महीने 250 से 300 नए मरीज सामने आ रहे हैं। इस समय 750 से अधिक मरीजों का उपचार चल रहा है। ज्यादातर मरीज कैराना और कांधला ब्लाॅक के गांवों में मिल रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि लक्षण नजर आते ही मरीज को जांच कर उपचार कराना चाहिए।
जिले में हेपेटाइटिस बी व सी के मरीज सामने आ रहे हैं। वर्तमान में हेपेटाइटिस बी के 80 व हेपेटाइटिस सी के 670 से ज्यादा मरीजों का उपचार चल रहा है। सभी पंजीकृत मरीजों को जिला अस्पताल से निशुल्क दवा दी जाती हैं। जिला अस्पताल में जांच की निशुल्क सुवधिा उपलब्ध है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. मनोज कुमार अखौरी ने बताया कि संक्रमित सुई का इस्तेमाल करने से यह बीमारी फैलती है। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर अप्रशिक्षित चिकित्सक एक सुई का बार-बार इस्तेमाल करते हैं। इससे हेपेटाइटिस होने का खतरा रहता है। हेपेटाइटिस के लक्षण नजर आते ही मरीज को जांच कर उपचार कराना चाहिए। इसमें लापरवाही बरतने पर बीमारी घातक रूप ले लेती है। उन्होंने बताया हेपेटाइटिस सी के मरीज का तीन माह तक चलता है। इसके बाद अगर बीमारी ठीक नहीं होती तो छह माह तक उपचार चल सकता है। हेपेटाइटिस बी के मरीज का उपचार एक से दो साल तक चलता है।
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तीन दिन लिए जाते हैं वायरल लोड जांच के लिए सैंपल
सीएमएस ने बताया कि जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस के मरीजों के वायरल लोड की जांच के लिए पहले सप्ताह में एक दिन शुक्रवार को सैंपल लिए जाते थे। अब सप्ताह में तीन दिन सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को मरीजों के सैंपल लेने के दिन निर्धारित हैं। वायरल लोड की जांच रिपोर्ट के आधार पर मरीजों को दवा दी जाती है।
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लक्षण
- भूख न लगना या कम करना।
- बुखार आना।
- पीलिया होना।
- पेट फूलना।
- उल्टी होना।
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बचाव
- इंजेक्शन लगवाते समय हर बार नई सीरिंज का इस्तेमाल करें।
- अप्रशिक्षित से उपचार न कराएं।
- लक्षण नजर आते ही जांच कर उपचार कराएं।