झिंझाना (शामली)। थाना क्षेत्र के गांव केरटू निवासी नदीम ने विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी, अवैध तस्करी और जबरन साइबर अपराध कराने का गंभीर आरोप लगाते हुए थाने में तहरीर दी। पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने एजेंट प्रिंस निवासी झिंझाना, एजेंट अमन निवासी नवी मुंबई और एजेंट सचिन निवासी हैदराबाद, तेलंगाना के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पीड़ित नदीम ने बताया कि वह चौसाना स्थित एक फाइनेंस कंपनी में कार्यरत था। 15 जुलाई 2025 को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो के माध्यम से टेलीग्राम आईडी के जरिए उसकी बातचीत एक युवक से हुई, जिसने अपना नाम प्रिंस बताया। प्रिंस ने थाईलैंड में डेटा एंट्री की नौकरी, अच्छा वेतन, रहना-खाना और कंपनी द्वारा खर्च उठाने का लालच दिया। एक साल का वीजा और कंपनी द्वारा बुलाए जाने की बात कही गई।
30 जुलाई को पुणे से बैंकाक का टिकट टेलीग्राम पर भेजा गया। 31 जुलाई को दिल्ली एयरपोर्ट पर नदीम की मुलाकात गांव केरटू निवासी रिजवान से हुई। उसे भी बैंकाक बुलाया गया था। दोनों 31 जुलाई को बैंकाक पहुंचे। बैंकाक एयरपोर्ट पर फोटो दिखाकर एक टैक्सी चालक दोनों को होटल ले गया।
अगले दिन दूसरी गाड़ी से उन्हें कथित कंपनी ले जाने के नाम पर जंगल के रास्ते कई घंटों का सफर कराया गया। इसके बाद पैदल चलाकर म्यांमार सीमा पार कराई गई और मवाडी क्षेत्र स्थित केके वन 5 बी नामक कंपनी में ले जाया गया। आरोप है कि वहां एजेंट प्रिंस उर्फ फाद और अमन ने दोनों के मोबाइल, सभी पहचान पत्र और करीब 60 हजार रुपये छीन लिए।
जबरन कंप्यूटर पर डेटिंग साइट से नंबर निकालने और साइबर अपराध से जुड़ा काम कराया गया। पीड़ित ने बताया कि इसी दौरान कंपनी में काम कर रहे सूबरी गांव निवासी सावेज और तसलीम से मुलाकात हुई, उन्हें भी इसी तरह टेलीग्राम के जरिए फंसाया गया था। तसलीम द्वारा भारत और म्यांमार एम्बेसी में शिकायत किए जाने के बाद 22 अक्तूबर 2025 को म्यामार आर्मी ने कार्रवाई करते हुए करीब 590 भारतीयों को मुक्त कराया और थाईलैंड भेजा। इसके बाद भारतीय दूतावास की मदद से 10 नवंबर 2025 को सभी को गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस लाया गया, जहां से पीड़ित अपने घर पहुंचे।
पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। आरोपियों की भूमिका, विदेश भेजने का नेटवर्क और अन्य पीड़ितों से जुड़े तथ्यों की छानबीन की जा रही है। जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।