संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिले के सरकारी अस्पतालों में साफ-सफाई को लेकर स्वास्थ्य विभाग के निर्देश सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं। हर रोज अलग-अलग रंग की बेडशीट बदलने का नियम है ताकि मरीजों को स्वच्छ माहौल मिल सके और उनका संक्रमण से बचाव हो।
दो दिन सोमवार और मंगलवार को जिले के सरकारी अस्पतालों की पड़ताल में सामने आया कि ये नियम सिर्फ कागजों में ही हैं, जमीन पर इसकी अनदेखी की जा रही है।
सरकारी अस्पतालों में पड़ताल के दौरान इस तरह का नजारा देखने को मिला
n स्थान : जिला अस्पताल शामली
चादर ही नहीं मिली : यहां के पुरुष वार्ड में सोमवार को तो निर्धारित कलर सफेद रंग की चादर बिछी थी, मगर मंगलवार को बेड पर चादर नहीं थी। मरीज ऐसे ही बगैर चादर के लेटे हुए थे।
n स्थान: शामली सीएचसी
रंगों का नियम उल्टा-पुल्टा : सोमवार को पांच बेड पर हरी, दो पर पीली और एक पर बिना चादर का बेड मिला, जबकि नियम के अनुसार उस दिन सफेद चादर होनी चाहिए थी। मंगलवार को भी नारंगी के बजाय हरी-पीली चादरें ही मिलीं।
n स्थान : झिंझाना सीएचसी
दोनों दिन एक ही चादर : सोमवार और मंगलवार दोनों दिन सिर्फ सफेद चादर ही बिछाई गई। कलर कोडिंग का नियम पूरी तरह ताक पर रखा गया था।
n स्थान: ऊन सीएचसी
सोमवार को सफेद और मंगलवार को पिंक रंग की चादर बिछी मिली।
n स्थान: कांधला सीएचसी
सोमवार को दो बेड पर ग्रीन और दो पर सफेद चादर, जबकि मंगलवार को भी यही स्थिति रही।
n स्थान: थानाभवन सीएचसी
सोमवार और मंगलवार दोनों दिन सफेद रंग की चादर मिली।
n स्थान: जलालाबाद पीएचसी
सोमवार को सफेद चादर मिली, मंगलवार को अस्पताल ही बंद था।
n क्यों तय किए गए थे रंग-बिरंगी चादरों के नियम : शिकायतें थीं कि अस्पतालों में कई-कई दिन तक एक ही चादर पड़ी रहती है। संक्रमण का खतरा बढ़ने पर स्वास्थ्य विभाग ने साफ-सफाई सुनिश्चित करने के लिए सातों दिन अलग-अलग रंग की चादर का नियम बनाया था।