डीजल के दाम में तेजी से लागत बढ़ेगी, किसानों पर बढ़ेगा भार
शामली। दिल्ली में डीजल के दाम में हुई वृद्धि के बाद यहां के किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि जिस तरह से डीजल के दाम लगातार बढ़ते जा रहे है, उससे फसलों की लागत बढ़ेगी और किसानों पर बोझ बढ़ जाएगा। लागत के हिसाब से फसलों के दाम न मिलने और गन्ने का भुगतान समय पर न होने से किसान पहले से ही आर्थिक रूप से परेशान है। डीजल के दाम में बढ़ोत्तरी को लेकर किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से बातचीत की गई। पेश हे रिपोर्ट...
डीजल के दाम बढ़ने से किसान की कमर टूट जाएगी। इस समय धान की फसल की बुआई की तैयारी चल रही है। धान में पानी की ज्यादा जरूरत होती है। इसके लिए डीजल की अधिक जरूरत पड़ती है। धान की फसल की जुताई में भी ट्रैक्टर को डीजल की ज्यादा जरूरत होगी। कोरोना के चलते किसानों को फसलों के दाम पहले ही कम मिल रहे हैं। अब डीजल इतना महंगा होता जा रहा है कि खेती की लागत बढ़ जाएगी। सरकार को डीजल पर सब्सिडी देनी चाहिए।
चौ. अनिल मलिक, राष्ट्रीय महासचिव भाकियू भानू।
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70 साल के इतिहास में इतने दाम कभी डीजल के नहीं बढ़े जितने अब बढ़ रहे हैं। दिल्ली में पेट्रोल के दाम से ज्यादा डीजल का दाम हो गया। यहां उप्र में भी थोड़ा ही अंतर है। अगर ऐसे ही दाम बढ़ते रहे तो किसान पर तो बोझ बढ़ेगा ही। साथ ही ट्रांसपोर्ट का खर्चा बढ़ने से महंगाई बढ़ेगी, जिससे आम आदमी समेत सभी वर्ग के लोग प्रभावित होंगे। भाकियू डीजल के दामों में बढ़ोत्तरी का विरोध करती है और सरकार से मांग करती है कि डीजल के दामों को कम करें।
- कुलदीप मलिक, प्रवक्ता भाकियू।
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किसान को पहले ही लागत के हिसाब से फसलों के दाम नहीं मिल रहे है। अब डीजल के दाम बढ़ रहे हैं। जिससे फसलों की लागत बढ़ रही है और दाम कम होते जा रहे है। ऐसे में किसान की कमर टूट जाएगी। सरकार को डीजल के दामों में बढ़ोत्तरी पर रोक लगाकर इसे कम करना चाहिए। सरकार को किसानों को सब्सिडी देकर राहत देनी चाहिए।
सवित मलिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष किसान यूनियन।