शामली। 26 जनवरी 1950 का दिन भारत देश के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। इस दिन भारतीय संविधान लागू होने पर हर तरफ जश्न का माहौल था। उस दिन को गांव के बुजुर्ग आज भी याद कर खुुश होने के साथ ही गर्व महसूस करते हैं।
गांव भैंसवाल निवासी 85 वर्षीय बत्तीसा खाप के चौधरी बाबा सूरजमल से पहले गणतंत्र दिवस के बारे में बात की गई तो उनका चेहरे पर खुशी झलकने लगी। उनका कहना था कि 26 जनवरी 1950 का दिन भारत के इतिहास का बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। वह दिन सभी देशवासियों के लिए गर्व करने का दिन है। पहले गणतंत्र दिवस पर गांव के माहौल को याद करते हुए बाबा सूरजमल ने कहा कि उस दिन ग्रामीणों में गजब का उत्साह था। युवाओं में जोश था। गांव की गलियों में भारत मां की जय के नारे गूंज रहे थे। गांव के लोग रणसिंघा लेकर घूमे थे। गांव की चौपाल पर ग्रामीणों ने मिलकर हवन किया था और खुशी में बताशे बांटे गए थे।
इसी गांव के 93 वर्षीय बलराज सिंह से बात की गई तो पहले गणतंत्र दिवस को लेकर उनका सीना गर्व से चौड़ा हो गया। उन्होंने कहा उस दिन गांव में जश्न जैसा माहौल था। उस समय उनकी उम्र करीब 23 साल थी। आजादी के बाद पहली बार लोगों को महसूस हुआ कि आजादी के बाद अब अपने देश के कानून का राज शुरू हुआ है। अंग्रेजों के बनाए कानून से मुक्ति मिली थी। गांव में किसानों ने खुशी मनाई थी। किसानों ने कहा था कि अंग्रेज लगान के नाम पर शोषण करते थे। अनाज ले जाते थेे, इससे छुटकारा मिला था। पहले गणतंत्र दिवस पर किसानों ने एक दूसरे को खील बताशे बांटकर खुशी मनाई थी।