शामली। इस बार हरियाणा से पांच रुपये प्रति क्विंटल अधिक गन्ना मूल्य होने से वेस्ट यूपी के किसानों के गन्ने का डायवर्जन रुक गया है। हरियाणा में कम गन्ना मूल्य होने से वहां के किसान अपना गन्ना पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड की चीनी मिलों की ओर ले जा रहे हैं।
हरियाणा, उत्तराखंड में गन्ने का मूल्य यूपी से अधिक रहने के कारण बागपत, शामली, सहारनपुर जिलों के किसान हरियाणा के पानीपत, करनाल, यमुनानगर जिले की चीनी मिलों और उत्तराखंड की हरिद्वार की लेबरहेेड़ी, लक्सर, इकबालपुर, रुद्रपुर की सितार गंज आदि चीनी मिलों को गन्ना देते थे। हरियाणा और उत्तराखंड के चीनी मिल एवं खांडसारी इकाइयों पर खरीद के लिए अस्थायी खरीद केंद्र खोल देते थे। इस बार यूपी में 25 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की गई है। 2012-13 के बाद पहली बार चुनावी साल को देखते हुए गन्ना मूल्य 290 रुपये प्रति कुंतल से बढ़ाकर 315 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है।
उधर, जिला गन्ना अधिकारी शामली डॉक्टर अनिल भारती उत्तराखंड में इस बार गन्ने की पैदावार कम हुई है। जिसके कारण सितारगंज, रुद्रपुर चीनी मिलों में नो केन चल रहा है। काशीपुर, गदरपुर चीनी मिलें पूर्व में ही बंद हो चुकी हैं। उधर, हरियाणा में गन्ना की पैदावार अधिक और मूल्य कम होने से पानीपत, करनाल, यमुनानगर जिलों की चीनी मिलों पर ब्रेक लग गया है। हरियाणा के किसान अपना गन्ना वेस्ट यूपी, उत्तराखंड की चीनी मिलों में ले जा रहे हैं।
उत्तराखंड में गन्ने की पैदावार कम होने से वहां की चीनी मिलें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, मुजफ्फरनगर जिलों की चीनी पर आधारित थीं।
इस बार उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर वहां ब्रेक लग जाने से हरियाणा के किसान वहां अपना गन्ना ले जा सकते हैं। हरियाणा में गन्ना मूल्य कम है। उत्तराखंड की चीनी मिलों में हरियाणा से सात रुपये अधिक गन्ना मूल्य है। शामली जिले में 52 हजार हेक्टेयर में चार करोड़ बीस लाख क्विंटल गन्ने की पैदावार हुई है।